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बंगाल में यूसीसी के लिए बनेगी समिति, आदिवासी समुदाय को रखा जाएगा दायरे से बाहर

मंत्रिमंडल के सामने 2 जुलाई को रखा जाएगा मसौदा, पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनेगी समिति; अगस्त में सौंपेगी रिपोर्ट।

कोलकाताः पश्चिम बंगाल सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की दिशा में औपचारिक कदम बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को विधानसभा में घोषणा की कि 'यूसीसी विधेयक-2026' का मसौदा 2 जुलाई को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही विधेयक का प्रारूप तैयार करने और सुझाव देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का भी ऐलान किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह समिति सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में काम करेगी। समिति में एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, एक विधि विशेषज्ञ, एक शिक्षाविद, एक समाजसेवी और एक अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी को सदस्य बनाया जाएगा।

सरकार ने समिति को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक महीने का समय दिया है। समिति अगस्त में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर यूसीसी विधेयक का अंतिम स्वरूप तैयार किया जाएगा और उसे आगे की प्रक्रिया के लिए लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर अलग-अलग नागरिक कानूनों की व्यवस्था समाप्त कर एक समान कानूनी ढांचा विकसित करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि कुड़मी सहित अन्य पारंपरिक जनजातीय समुदायों पर यूसीसी लागू नहीं होगा और उनके पारंपरिक अधिकारों तथा सामाजिक व्यवस्थाओं का संरक्षण किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों के अनुभवों का अध्ययन करते हुए समिति अपनी सिफारिशें तैयार करेगी। इसके बाद उन्हीं सुझावों के आधार पर विधेयक का अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा।

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