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गुजरात की मंडप योजना से बदली आदिवासी किसानों की किस्मत, सब्जी उत्पादन और आय में बढ़ोतरी

गुजरात मंडप योजना बनी आदिवासी किसानों की ताकत, सब्जी खेती से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

By प्रियंका महतो

Jun 29, 2026 21:06 IST

वलसाड : गुजरात सरकार की मंडप योजना वलसाड जिले के आदिवासी क्षेत्रों में सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रही है। आधुनिक ट्रेलिस (मंडप) आधारित खेती को बढ़ावा देने वाली इस योजना से किसानों की उत्पादकता बढ़ी है, फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और पूरे वर्ष नियमित आय का स्रोत तैयार हुआ है। इससे आदिवासी किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।

धारमपुर तालुका और आसपास के क्षेत्रों में इस योजना के तहत लगभग 20 हजार किसान करेला, लौकी, टिंडोरा (कुंदरू) और परवल जैसी बेल वाली सब्जियों की खेती मंडप प्रणाली के माध्यम से कर रहे हैं। इस तकनीक में फसलें ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) तरीके से बढ़ती हैं, जिससे उनकी देखभाल आसान होती है, फसल का नुकसान कम होता है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।

किसानों का कहना है कि बागवानी विभाग से मिलने वाली सरकारी सहायता ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। किसान विजयभाई दलवी ने बताया कि प्रति हेक्टेयर करीब 39 हजार से 40 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलती है, जबकि बड़े खेतों के लिए यह सहायता लगभग 1.20 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि इस आर्थिक सहयोग से किसानों को काफी राहत मिली है और अधिक लोग इस योजना से जुड़ रहे हैं।

मंडप प्रणाली से टिंडोरा और परवल की खेती करने वाले किसान गोपालभाई कुनवर ने बताया कि मंडप तैयार करने में लगभग 50 हजार से 60 हजार रुपये का खर्च आता है। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर साल करीब 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक की आय होती है, जिससे उनके परिवार का खर्च आसानी से चलता है। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार का बागवानी विभाग भी इस योजना के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराता है।

अधिकारियों के अनुसार मंडप प्रणाली से उगाई गई सब्जियों की गुणवत्ता पहले की तुलना में बेहतर हुई है। इसका लाभ किसानों को बाजार में भी मिल रहा है। अब व्यापारी सीधे खेतों से सब्जियां खरीदकर मुंबई के थोक बाजारों तक पहुंचा रहे हैं। साथ ही इस तकनीक से फसल की अवधि भी बढ़ गई है, जिससे किसान लंबे समय तक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं और पूरे वर्ष उनकी आय अधिक स्थिर बनी रहती है।

पिछले पांच वर्षों से मंडप प्रणाली के जरिए खेती कर रहे किसान यशवंतभाई वालगड़ ने बताया कि इस खेती से होने वाली आय उनके परिवार के लिए बड़ा सहारा बनी है। उन्होंने कहा कि सब्जी उत्पादन के साथ-साथ वे डेयरी व्यवसाय भी करते हैं और सरकार मंडप तैयार करने के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करती है।

अधिकारियों ने बताया कि मंडप योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इस योजना ने आदिवासी किसानों के बीच आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है। इसके साथ ही सब्जी उत्पादन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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