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बंगाल में क्यों कहा जा रहा है कि दूसरे चरण का चुनाव ही करेगा किस्मत का फैसला? क्या होगा सियासी समीकरण?

माना जा रहा है कि बंगाल में दूसरे चरण का चुनाव बेहद अहम होने वाला है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि मतदान का दूसरा चरण ही बंगाल की किस्मत तय करेगा।

By Moumita Bhattacharya

Apr 25, 2026 17:49 IST

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के बाद अब सबकी निगाहें दूसरे चरण पर टिकी हुई है। पहले चरण में जहां राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ जिसमें नया रिकॉर्ड कायम हुआ। अब दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होने वाला है।

माना जा रहा है कि बंगाल में दूसरे चरण का चुनाव बेहद अहम होने वाला है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि मतदान का दूसरा चरण ही बंगाल की किस्मत तय करेगा।

पर क्यों इतना अहम माना जा रहा है दूसरे चरण का चुनाव?

तृणमूल पर बढ़ेगा दबाव

पिछले कई सालों से ममता बनर्जी की सरकार में दक्षिण बंगाल तृणमूल का गढ़ रहा है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क हो या विभिन्न सरकारी परियोजनाएं यहां हर बात प्रमुख मुद्दा बन सकता है। बात अगर 2021 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो उस समय 142 सीटों में से 123 पर तृणमूल ने अपना कब्जा जमाया था।

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वहीं भारतीय जनता पार्टी के हिस्से में महज 18 सीटें ही आयी थी। इस साल भाजपा ने राज्य में सत्ता पलटने के लिए अपनी एड़ी-चोटी का दम लगा लगा दिया है। हालांकि दोनों पक्षों (तृणमूल और भाजपा) अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है और लगातार दावा किया जा रहा है कि 4 मई को मतगणना वाले दिन उनके चेहरे पर ही मुस्कान खिलेगी।

भवानीपुर बना चुनावी समर का केंद्र

विधानसभा चुनाव 2026 में अगर किसी विधानसभा केंद्र के बारे में सबसे ज्यादा चर्चाएं हो रही हैं तो वह भवानीपुर और नंदीग्राम है। नंदीग्राम में जहां भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को चुनावी रण में उतारा वहीं तृणमूल ने इस सीट से किसी समय शुभेंदु के करीबी रहे पवित्र कर को चुनावी मैदान में उतारा।

पहले चरण में नंदीग्राम विधानसभा केंद्र पर चुनाव सम्पन्न हो चुका है। वहीं दूसरे चरण में चुनावी समर का केंद्र बिन्दु भवानीपुर है। इस सीट से तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी चुनावी मैदान में उतर रही हैं। उनसे सामने भाजपा ने एक बार शुभेंदु अधिकारी को ही उतारा है।

गौरतलब है कि साल 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था। उस समय भी उनके सामने शुभेंदु अधिकारी ही थे। उस चुनाव में ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था। बाद में भवानीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में ममता बनर्जी ने जीत दर्ज की।

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कौन से जिलों पर होगी सबकी नजरें?

विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में जिन जिलों पर सबकी नजरें होंगी उनमें शामिल हैं -

कोलकाता (उत्तर और दक्षिण)

हावड़ा

हुगली

दक्षिण 24 परगना

उत्तर 24 परगना

नदिया

पूर्व बर्धमान

गौरतलब है कि ये सभी जिलों में शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के इलाके मौजूद हैं। यहां मतदान के लिए मुद्दे भी अलग-अलग होंगे और मतदान करने वाले मतदाताओं की सोच भी। कोई यहां रोजगार के मौकों के मुद्दे पर वोट करेगा तो कोई सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दों को चुनावी पैमाना बनाएगा। यहीं वजह है कि विशेषज्ञ दूसरे चरण के चुनाव को कहीं अधिक जटिल होने की संभावना जता रहे हैं।

क्या होगा चुनावी समीकरण?

बंगाल चुनाव के दूसरे चरण में 142 सीटों पर करीब 1448 उम्मीदवार अपनी किस्मत दांव पर लगाने वाले हैं। इसमें से 142 सीटों पर ही तृणमूल ने और 141 सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। कांग्रेस ने भी 142 सीटों और सीपीएम ने 100 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

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खास बात है कि दूसरे चरण में कोलकाता और हावड़ा के सभी शहरी क्षेत्रों की सीटें भी आ रही हैं, जहां मुकाबला रोजगार, जल निकासी, सड़क आदि मुद्दों पर हो सकता है। 29 अप्रैल को उन इलाकों में चुनाव होने वाले हैं जहां साल 2021 के चुनाव में तृणमूल ने क्लीन स्वीप किया था और भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पायी थी। इससे ही समझा जा सकता है कि इन इलाकों पर ममता बनर्जी की पकड़ कितनी मजबूत है।

हालांकि भाजपा SIR, घुसपैठ और आरजी कर कांड जैसी महिला सुरक्षा के मुद्दों पर तृणमूल को घेरने की कोशिशों में कोई कमी नहीं ला रही है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या ममता बनर्जी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल अपनी जीत का हैट्रिक लगा पाती है या फिर भाजपा को बढ़त मिलती है!

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