पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का पहला चरण सम्पन्न हो चुका है। अब हर किसी की निगाहें 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण पर टिकी हैं जिसमें महानगर कोलकाता में भी चुनाव होने हैं। पिछले सप्ताह हमने कोलकाता की गलियों और कई लोकप्रिय मार्केट जैसे न्यू मार्केट, लेक मार्केट और बाघाजतिन मार्केट में लोगों के मन टटोलने की कोशिश की। करीब 50 लोगों से बातचीत की और उनसे उनके राजनीतिक पसंद के बारे में जाना।
लेक मार्केट में एक फूल विक्रेता ने कहा कि हम इस साल बहुत डरे हुए हैं। मैं नहीं चाहता कि हमारे राज्य में भाजपा आए।
Read Also | ममता बनर्जी के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल, कब?
हालांकि सभी ने अपनी राय जरूर रखी लेकिन उनकी बातों में एक संयम नजर आ रहा था। सावधानी पूर्वक बातचीत की जा रही थी लेकिन कोई अनजान व्यक्ति जैसे ही पास से गुजर जाए तो बातें भी बीच रास्ते में रुक जाती थी।
ANI क्या कोलकाता को फिर से ममता बनर्जी की सरकार बनने को लेकर है उम्मीदें?
भले ही हमने 40 से 50 लोगों से उनकी राय जानने के लिए संपर्क किया लेकिन उनमें से कुछ ही चुनिंदा लोग रहे जो खुलकर इस मुद्दे पर बोलने के लिए तैयार हुए। इन्हीं मार्केट में एक दुकानदार ने तो चीखकर कहा, "जय बांग्ला। तृणमूल पक्का जीतेगी। जय ममता बनर्जी। जय अभिषेक बनर्जी।"
वहीं एक अन्य ने फुसफुसाकर कहा, "दादा, मारामारी होबे एई बार, खुद टेंशन ए आची" (भैया, मुझे लगता है, इस बार बहुत मारामारी होगी। बहुत टेंशन में हूं।) मुझे उम्मीद है कि मेरा व्यवसाय प्रभावित नहीं होगा।
कुछ राजनीतिक जानकारों का अभी भी मानना है कि ममता बनर्जी और तृणमूल को बंगाल से हटाना भाजपा के लिए लगभग असंभव है। लेकिन ममता बनर्जी के खिलाफ असंतोष जरूर दिखाई दे रहा है पर यह एक बड़े बदलाव का छोटा सा हिस्सा भर है।
हालांकि सभी कोई चुप नहीं रहा। हॉग मार्केट (न्यू मार्केट) में विदेशी मछलियों के विक्रेता भोला मैत्रा ने कहा, "जय बांग्ला। टीएमसी कम से कम 230 से 240 सीटें जीतेगी।" एक अन्य दुकानदार ने उत्साह के साथ कहा, "भाजपा जीतेगी। पाल्टानो दोरकार, चाई BJP सरकार।" (बदलाव जरूरी है, भाजपा की सरकार चाहिए।)
ANI क्या CPI(M) का नहीं है कोई सवाल?
कई लोगों से बातचीत करने पर यह विभाजन लगभग बराबर दिखाई देता है - आधा हिस्सा सत्ताधारी पार्टी तृणमूल के समर्थन में है, जबकि दूसरा आधा हिस्सा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में खड़ा है। बहुत कम लोग ही ऐसे दिखे जो वामपंथ के पुराने दौर की यादों से जुड़े हुए हैं।
जादवपुर विश्वविद्यालय की छात्रा सृष्टि बाल कहती हैं कि इस बार CPI(M) की कोई संभावना नहीं है। हमसे बाघाजतिन मार्केट क्रॉसिंग के पास मिली सृष्टि का मानना है कि वे अपने गढ़ जादवपुर में भी जीत नहीं सकेंगे। जेन-ज़ी ने तो यहां तक दावा किया कि CPI(M) इस बार 1 भी सीट नहीं जीतने वाला है।
महिला सशक्तिकरण : टीएमसी बनाम भाजपा
हाल ही में बर्धवान में अपनी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भाजपा शासन में महिलाएं और लड़कियां कहीं भी, कभी भी स्वतंत्र रूप से घूम सकेंगी। भाजपा सरकार का मतलब महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी। यही भाजपा और निर्मम तृणमूल सरकार के बीच का सबसे बड़ा अंतर है।”
हालांकि जमीनी स्तर पर लोग इस दावे से पूरी तरह सहमत नहीं दिखते। 2025 में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट में कोलकाता को भारत का सबसे सुरक्षित शहर बताया गया। वहीं, कई भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं की सुरक्षा और अपराध को लेकर खराब छवि की चर्चा होती रहती है।
Read Also | सुबह-सुबह गंगा में नौका विहार कर PM मोदी ने 'बंगाल की आत्मा' को छूकर लिया विकास का प्रण, देखें Video
एक युवा महिला पार्टनर का कहना है कि हम आधी रात को भी बिना डर के खाना डिलीवर करते हैं। अगर इस बार भाजपा जीतती है, तो शायद यह स्थिति वैसी न रहे।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी ने कई बार यह आरोप भी लगाया है कि तृणमूल महिला सशक्तिकरण और आरक्षण नहीं चाहती... पश्चिम बंगाल की महिलाएं इस चुनाव में तृणमूल को सजा देंगी। हमने एक अन्य महिला चाय विक्रेता से बात की, जो मूल रूप से बिहार के मोतीपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा, “जहां से मैं आती हूं, वहां छेड़छाड़ सड़क पर होने वाली गाली-गलौज आम बात है। लेकिन मैं पिछले 5 सालों से कोलकाता में हूं और मेरे साथ कभी भी ऐसी घटना नहीं घटी।”
बेरोजगारी के मुद्दे पर भाजपा का तृणमूल पर हमला
अब आता है बंगाल का सबसे चर्चित और सोशल मीडिया - खासकर इंस्टाग्राम पर वायरल मुद्दा : नौकरियां। यह हमेशा से ममता बनर्जी सरकार के लिए एक अहम चुनौती रहा है।
पुरुलिया में अपनी रैली के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल पर तीखा हमला करते हुए कहा, “युवाओं और शिक्षकों की नियुक्ति, बच्चों के मिड-डे मील, ग्रामीण रोजगार योजनाओं, आवास योजनाओं के पैसे, गांव की सड़कों और यहां तक कि चक्रवात प्रभावितों के लिए राहत में भी लूट होती है।”
इस मुद्दे पर हमसे बात करते हुए राइस एजुकेशन के छात्र ने कहा, “मैं यह नहीं कहता कि बंगाल में नौकरियों की कमी है। नौकरियां काफी हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता और वेतन स्तर Gen-Z को आकर्षित नहीं करता।”
ANI क्या वाकई भाजपा इस बार चुनाव में जीत सकती है?
भारतीय जनता पार्टी की रणनीति काफी हद तक “साइलेंट वोटर” की धारणा पर टिकी है। पार्टी का दावा है कि जैसे 2011 में वामफ्रंट के खिलाफ लोगों का गुस्सा सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया था फिर भी ममता बनर्जी की जीत हुई। उसी तरह इस बार भी तृणमूल सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा मौजूद है।
झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एई समय लाइव से बातचीत में दावा किया कि भाजपा को 200 सीटें मिलेंगी। मैं 100% आश्वस्त हूं। इस बार कोई मुकाबला नहीं है।
अब अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में तृणमूल को 47.9% वोट मिले थे जबकि बीजेपी को 38.1%। यानी लगभग 10% का अंतर। लेकिन सीटों में अंतर बहुत बड़ा था : टीएमसी को 213 सीटें मिलीं और भाजपा को सिर्फ 77 - यानी 136 सीटों का भारी अंतर। रिपोर्ट्स के अनुसार तृणमूल के पास 114 ऐसी सीटें थीं जहां जीत का अंतर 10% से अधिक था।
Read Also | अपने इलाके में गड़बड़ी-हिंसा-अशांति देखें तो तुरंत चुनाव आयोग के टोल-फ्री नंबर पर करें संपर्क
2021 में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 6.2 करोड़ था। इस हिसाब से तृणमूल और भाजपा के बीच वोटों का अंतर लगभग 62 लाख होता है। अब यह भी उल्लेख किया गया है कि SIR के कारण पूरे बंगाल से 91 लाख लोगों का नाम हटाए गए। इनमें से लगभग 16 मिलियन नाम मालदह, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में बताए गए हैं, जिनमें कुल 74 सीटें आती हैं (TOI रिपोर्ट के अनुसार)।
इस तर्क के आधार पर कहा जा रहा है कि यदि भाजपा इन 74 सीटों में से सभी जीत लेती है, तो उसके पास कुल 151 सीटें हो सकती हैं, जो सरकार बनाने के लिए आवश्यक 148 सीटों से अधिक हैं। कई लोगों का दावा है कि “फर्जी” या “अवैध” नामों को हटाया गया है और अब चुनाव “साफ वोटर लिस्ट” के साथ होंगे।
वहीं कुछ अन्य लोगों का आरोप है कि दशकों से बंगाल में रह रहे लोगों के नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
इस समय पर एक सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है - अगर ममता बनर्जी नहीं, तो फिर कौन?
बंगाल में कई लोग अब भी भाजपा को “बाहरी पार्टी” के रूप में देखते हैं। हालांकि कुछ लोग इसे सिर्फ राजनीतिक वक्तव्य ही मानते हैं।
इसका जवाब पाने के लिए 4 मई 2026 तक का इंतजार करने के बाद ही मिल पाएगा।
इस साल पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में होगा। पहला चरण गुरुवार, 23 अप्रैल को 152 विधानसभा सीटों पर हो चुका है जिनमें मेकलीगंज, अलीपुरदुआर, मालदह आदि शामिल हैं। बाकी 142 सीटों पर मतदान बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को होगा।
(News Ei Samay से साभार)