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AAP में बड़ा राजनीतिक भूचाल, राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों का BJP में जाने का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी छोड़ने की घोषणा, संजय सिंह ने लगाया “धोखे और साजिश” का आरोप।

By श्वेता सिंह

Apr 24, 2026 17:51 IST

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) में उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि पार्टी के दो-तिहाई सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

7 सांसदों के BJP में विलय का दावा

राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें से 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय संविधान के प्रावधानों के तहत लिया गया है। सभी सांसद भारतीय जनता पार्टी में विलय कर रहे हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद थे।

चड्ढा के अनुसार, इस निर्णय से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज राज्यसभा सभापति को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा विलय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।

AAP से दूरी बनाने की वजह

राघव चड्ढा ने कहा कि जिस AAP को उन्होंने वर्षों तक मजबूत किया, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। उनके अनुसार, पार्टी अब जनहित की बजाय व्यक्तिगत हितों की राजनीति कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लंबे समय से यह महसूस हो रहा था कि वे “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” हैं, इसलिए उन्होंने पार्टी से अलग होकर जनता के करीब जाने का निर्णय लिया है।

AAP का पलटवार-संजय सिंह ने बताया साजिश

इस पूरे घटनाक्रम के बाद आप पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है और इसके पीछे एक “राजनीतिक साजिश” है।

संजय सिंह ने उन 7 सांसदों के नाम भी बताए, जिनके पार्टी छोड़ने की बात कही जा रही है। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह शामिल हैं।

हरभजन सिंह पर सस्पेंस बरकरार

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे राजनीतिक चर्चाओं में और बढ़ोतरी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका होगा। साथ ही आने वाले समय में चुनावी समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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