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दिल्ली दंगा 2020 केस में फैसला : लूटपाट और आगजनी मामले में 9 को राहत, अदालत ने सबूतों को माना कमजोर

अदालत का कहना था कि गवाहों के बयान भरोसेमंद नहीं हैं क्योंकि वे स्पष्ट और ठोस नहीं थे। अभियुक्तों को संदेह का लाभ दिया गया।

By डॉ. अभिज्ञात

Apr 02, 2026 18:46 IST

नई दिल्ली: वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में अदालत ने नौ लोगों को बरी कर दिया है। अदालत का कहना था कि पेश किए गए गवाहों के बयान भरोसेमंद नहीं हैं क्योंकि वे स्पष्ट और ठोस नहीं थे, बल्कि सामान्य प्रकृति के थे।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह इस मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसमें शाह आलम, राशिद सैफी, मोहम्मद शादाब, हबीब, इरफान, सुहैल, सलीम उर्फ आशु, इरशाद और अज़हर उर्फ सोनू को अभियुक्त बनाया गया था। इन सभी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान लूटपाट और आगजनी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

30 मार्च को दिए गए आदेश में अदालत ने कहा कि गवाहों के बयान घटनास्थल और घटनाक्रम के बारे में सटीक जानकारी देने में असफल रहे। न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ गवाहों ने स्थान से संबंधित तथ्य गलत बताए, जिससे उनके बयान संदिग्ध हो गए।

मामला दयालपुर थाने में दर्ज किया गया था, जिसमें एक इनोवा क्रिस्टा कार को नुकसान पहुंचाने, मोटरसाइकिल जलाने, रेहड़ी-पटरी वालों से लूटपाट करने और ‘रॉयल मोटर्स’ नामक दुकान में आग लगाने के आरोप शामिल थे। यह घटनाएं चांद बाग इलाके में दंगों के दौरान हुई थीं।

अदालत ने यह भी पाया कि चश्मदीद गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास थे। जांच अधिकारी द्वारा घटना की तारीख 24 फरवरी दर्ज की गई थी, जबकि घटना 25 फरवरी 2020 को हुई थी। एक गवाह ने इस गलती को लेकर संबंधित डीसीपी को शिकायत भी दी थी।

न्यूज़ चैनल की गाड़ी पर हमले के मामले में भी अदालत ने पाया कि ड्राइवर और यात्री द्वारा बताई गई जगह और समय पुलिस के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे। अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मियों के कुछ बयान तथ्यात्मक रूप से गलत साबित हुए।

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध करना सुरक्षित नहीं है इसलिए अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। साथ ही उनकी जमानत शर्तें समाप्त कर दी गईं और जमानती बांड रद्द कर दिए गए।

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