गर्भवती महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं लेकिन रात में अचानक पैरों में ऐंठन हो जाए तो पूरी नींद खराब हो जाती है। गर्भावस्था में कई बार पैरों के काफ मसल में तेज खिंचाव होता है। दर्द इतना बढ़ जाता है कि आंखों में आंसू तक आ जाते हैं। अत्यधिक थकान, शरीर में कैल्शियम-फॉस्फोरस की कमी, पैरों की रक्तनलियों पर दबाव और हार्मोन में बदलाव के कारण गर्भवती महिलाओं के पैरों में ऐंठन होती है। हालांकि सभी के साथ ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है लेकिन इस समस्या से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
गर्भावस्था में पैरों में ऐंठन से कैसे बचें?
स्ट्रेचिंग करें
गर्भावस्था में हल्का व्यायाम कई बार फायदेमंद होता है। इससे भ्रूण का विकास बेहतर होता है और प्रजनन स्वास्थ्य में रक्त संचार ठीक रहता है। पैरों में ऐंठन से बचने के लिए नियमित रूप से स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं। इससे पैरों की मांसपेशियों और नसों की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है। हालांकि प्रेगनेंसी में हर तरह की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज नहीं की जा सकती इसलिए व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
पैर लटकाकर काम न करें
गर्भावस्था में भी कई महिलाओं को ऑफिस का काम करना पड़ता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठना जितना ठीक नहीं है, उतना ही पैर लटकाकर बैठना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे पैरों में रक्त संचार कम हो जाता है, जिससे ऐंठन की संभावना बढ़ जाती है। कुर्सी पर बैठने के बाद छोटे स्टूल पर पैर रख सकते हैं। इसके अलावा बीच-बीच में थोड़ा टहलना भी जरूरी है।
कंप्रेशन सॉक्स काम आते हैं
कई कारणों से शरीर के निचले हिस्से में रक्त संचार कम हो जाता है। इससे भी पैरों में ऐंठन हो सकती है। ऐसे में कंप्रेशन सॉक्स उपयोगी साबित होते हैं। इस तरह के खास मोजे पैरों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करते हैं। डॉक्टर की सलाह लेकर कंप्रेशन सॉक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि बहुत जरूरत न हो तो इन्हें इस्तेमाल न करना ही बेहतर है क्योंकि इससे नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है।
पर्याप्त पानी पिएं
गर्भावस्था में भी रोज 3 से 4 लीटर पानी पीना जरूरी होता है। कम पानी पीने से भी पैरों में ऐंठन हो सकती है। ऐसे में रोज पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से इस समस्या से बचा जा सकता है।
संतुलित आहार जरूरी है
गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान को लेकर विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। इस समय आहार में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट, विटामिन और खनिज से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करना चाहिए। संतुलित आहार कई तरह की जटिलताओं को कम करने में मदद करता है। हालांकि डॉक्टर की सलाह के बिना इस दौरान कोई भी फैसला न लें।