अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौता फिलहाल अधर में लटक गया है। इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने व्हाइट हाउस में उच्चस्तरीय बैठक की लेकिन समझौते को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
हालांकि ट्रंप ने प्रस्तावित समझौते में कुछ बदलाव किए हैं और संशोधित प्रस्ताव ईरान के विचार के लिए भेजा गया है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि यदि ईरान इन शर्तों को स्वीकार नहीं करता तो उसके खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरी ओर तेहरान अपने रुख पर कायम है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसके अधिकारों और हितों की पूरी तरह रक्षा नहीं होती तब तक वह अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। रविवार (31 मई) को ईरान के मुख्य प्रवक्ता मोहम्मद बाघेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने उक्त बातें कही। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान 'दुश्मन के वादों' पर भरोसा नहीं करता और अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि उन्हें ईरान के साथ समझौता करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यदि ईरान अमेरिका द्वारा निर्धारित ‘रेड लाइन’ का पालन नहीं करता तो अमेरिका उसके साथ कोई समझौता नहीं करेगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में ईरान के खिलाफ एक बार फिर सैन्य संघर्ष या युद्ध की संभावना बन सकती है।
इसी तरह का बयान अमेरिकी रक्षा सचिव पेटे हेगसेठ (Pete Hegseth) ने भी दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं और अमेरिका की शर्तें नहीं मानी जाती हैं तो अमेरिका अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार ईरान के साथ युद्ध को खत्म करने के लिए प्रस्ताविक समझौते की कई शर्तों को अमेरिकी राष्ट्रपति ने बदला भी है। कुछ शर्तों को पहले से अधिक कठोर किए गए हैं। ईरान के पास इन शर्तों को सोच-विचार के लिए भेजा गया है।
हालांकि शांति समझौते की शर्तों में क्या बदलाव किया गया है इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। इस बीच मीडिया को दिए एक बयान में ईरान के मुख्य प्रवक्ता मोहम्मद बाघेर गालिवाफ ने कहा कि जब तक ईरान यह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि उनके अधिकारों को सुरक्षित रखा गया है तब तक किसी भी समझौते पर वे हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
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गौरतलब है कि अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते के तहत ईरान चाहता है कि उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाए और विदेशों के बैंकों में जब्त उसकी संपत्तियों को मुक्त कर दिया जाए। ईरान इसे अपने प्रमुख अधिकारों में से एक मानता है और चाहता है कि समझौते में इसकी स्पष्ट गारंटी हो।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान की जब्त की गई 12 अरब डॉलर की संपत्ति को मुक्त करने पर सहमत हो गए हैं। इस संबंध में अमेरिका और ईरान के बीच एक मसौदा (ड्राफ्ट) भी तैयार किया गया है। मसौदे के अनुसार समझौता होने के 60 दिनों के भीतर ईरान को इस धनराशि के उपयोग की अनुमति मिल जाएगी और वह अपनी पसंद के बैंकों के माध्यम से इसका इस्तेमाल कर सकेगा।
साथ ही डोनाल्ड ट्रंप सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि समझौते के प्रस्ताव में परमाणु हथियारों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि इन बातों पर ईरान भरोसा करने के लिए तैयार नहीं है।