नई दिल्ली : देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती ने 17 मार्च को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया जिससे वित्तीय जगत में हलचल मच गई। अब उन्होंने स्वयं अपने इस निर्णय के पीछे की वजह सार्वजनिक की है।
एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में चक्रवर्ती ने कहा कि बैंक के कुछ कार्यों में “नैतिकता की कमी” थी, जिसके कारण उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उनके अनुसार, पिछले वर्ष सितंबर में दुबई में बैंक द्वारा कुछ नियमों का उल्लंघन किया गया था। इस घटना के बाद वहां HDFC बैंक के नए ग्राहकों को जोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। चक्रवर्ती का आरोप है कि बैंक ने इस मामले को केवल “तकनीकी त्रुटि” बताकर टालने की कोशिश की, जो उनके मूल्यों के विपरीत था।
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस्तीफे के पीछे एक और बड़ा कारण ‘क्रेडिट सुइस’ के जोखिमपूर्ण बॉन्ड में निवेश है, जिससे उच्च संपत्ति वाले ग्राहकों को भारी नुकसान हुआ। 18 मार्च को उनके इस्तीफे के बाद बैंक के बाजार मूल्य में लगभग 21 बिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।
सूत्रों के मुताबिक, चक्रवर्ती द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए बैंक ने बाहरी वकीलों को नियुक्त किया है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि HDFC बैंक की वित्तीय स्थिति और पूंजी आधार अभी भी मजबूत है।
यह घटनाक्रम बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और नैतिक मानकों को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।