अहमदाबाद : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में ट्रैक बिछाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना में पहली बार जापानी शिंकान्सेन तकनीक पर आधारित उन्नत जे-स्लैब बैलेस्टलेस ट्रैक सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। यह जानकारी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से जारी आधिकारिक बयान में दी गई है।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अनुसार जे-स्लैब ट्रैक सिस्टम चार मुख्य घटकों से मिलकर बना है-आरसी ट्रैक बेड, सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार (सीएएम), प्रीकास्ट ट्रैक स्लैब और फास्टनर्स के साथ रेल। यह प्रणाली विशेष रूप से हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
ट्रैक स्लैब के निर्माण के लिए गुजरात में सूरत के पास किम और आनंद में अत्याधुनिक ट्रैक स्लैब मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित की गई हैं। इन इकाइयों में उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट स्लैब सटीक मापदंडों के अनुसार तैयार किए जा रहे हैं ताकि परियोजना के लिए लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
निर्मित स्लैब को फैक्ट्री में संग्रहित किया जाता है और फिर ट्रेलरों के माध्यम से ट्रैक कंस्ट्रक्शन बेस (टीसीबी) तक पहुंचाया जाता है। ये बेस ग्राउंड और वायाडक्ट दोनों जगहों पर सामग्री, मशीनरी और उपकरणों के संचालन के केंद्र के रूप में काम करते हैं। वर्तमान में कुल 10 टीसीबी सक्रिय हैं-चार सूरत, बिलिमोरा और वापी के बीच तथा छह वडोदरा, आनंद और अहमदाबाद के बीच।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड एक सरकारी स्वामित्व वाली इकाई है जिसे विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के रूप में स्थापित किया गया है। यह केंद्र सरकार (रेल मंत्रालय के माध्यम से 50 प्रतिशत हिस्सेदारी) और गुजरात व महाराष्ट्र राज्य सरकारों (प्रत्येक 25 प्रतिशत हिस्सेदारी) का संयुक्त उपक्रम है।
बयान के अनुसार ट्रैक निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तक 185 रूट किलोमीटर में आरसी ट्रैक बेड बिछाया जा चुका है जबकि 188 रूट किलोमीटर के लिए ट्रैक स्लैब तैयार किए गए हैं। इसके अलावा 70 रूट किलोमीटर में स्लैब बिछाने और सीएएम इंजेक्शन का काम भी पूरा हो चुका है।
इस परियोजना में ट्रैक इंस्टॉलेशन पूरी तरह मशीनीकृत है और इसके लिए विशेष मशीनों का उपयोग किया जा रहा है जिन्हें जापानी निर्माण पद्धति के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इनमें से अधिकांश उपकरण भारत में ही निर्मित किए गए हैं।
प्रमुख मशीनों में फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन शामिल है जो 25 मीटर लंबे 60 किलोग्राम रेल को जोड़कर 200 मीटर लंबे पैनल तैयार करती है। इन वेल्डेड रेलों को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से संचालन के लिए कड़े परीक्षण और अनुमोदन प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। रेल वेल्डिंग और निरीक्षण के लिए जापानी कंपनी JARTS द्वारा प्रशिक्षण और प्रमाणन भी कराया गया है।
ट्रैक स्लैब लेइंग कार (एसएलसी) का उपयोग प्रीकास्ट स्लैब को उठाकर वायाडक्ट पर स्थापित करने के लिए किया जाता है जो एक बार में पांच स्लैब तक संभाल सकती है। वहीं रेल फीडर कार (आरएफसी) 200 मीटर लंबे रेल पैनल को ट्रैक बेड पर ले जाने और बिछाने का काम करती है।
स्लैब लगाने के बाद सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार इंजेक्शन कार (सीएएम कार) के जरिए स्लैब के नीचे सीएएम मिश्रण डाला जाता है जिससे ट्रैक का सही संरेखण और समतलता सुनिश्चित होती है।
उन्नत तकनीक और पूरी तरह मशीनीकृत प्रक्रियाओं को अपनाने से भारत के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में ट्रैक बिछाने का काम अधिक सटीक, तेज और कुशल बनने की उम्मीद है।