🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

घुटनों के मरीजों के लिए बड़ी राहत, नई तकनीक से तेज रिकवरी और कम दर्द का दावा

अब बिना पूरा घुटना बदले होगा इलाज, अपोलो कोलकाता ने शुरू की आधुनिक सर्जरी।

By रजनीश प्रसाद

Jun 12, 2026 19:01 IST

कोलकाता : अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स, कोलकाता ने ऑर्थोपेडिक देखभाल के क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए ‘प्रिसिजन पार्शियल नी रिकंस्ट्रक्शन’ (सटीक आंशिक घुटना पुनर्निर्माण) सर्जरी की शुरुआत की है। यह आधुनिक तकनीक उन मरीजों के लिए एक प्रभावी विकल्प मानी जा रही है जिन्हें पूरे घुटने को बदलने की बजाय केवल उसके क्षतिग्रस्त हिस्से के इलाज की आवश्यकता होती है।

अस्पताल के सीनियर कंसलटेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रंजन कामिल्या और कंसलटेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सौमेन कार ने मेडिकल ब्रीफिंग में बताया कि इस तकनीक के जरिए केवल घुटने के खराब हिस्से को बदला जाता है। इससे स्वस्थ हड्डियां, आसपास के ऊतक और प्राकृतिक लिगामेंट सुरक्षित रहते हैं जिससे घुटने की प्राकृतिक कार्यक्षमता और गतिशीलता बनी रहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अध्ययनों में इस तकनीक के परिणाम काफी सकारात्मक पाए गए हैं। ऑक्सफोर्ड के शोध के मुताबिक इस सर्जरी के बाद प्रत्यारोपित हिस्सा 10 वर्षों तक 93 प्रतिशत और 15 वर्षों तक 89 प्रतिशत मामलों में सफलतापूर्वक कार्य करता है। इसके अलावा, पारंपरिक टोटल नी रिप्लेसमेंट की तुलना में शुरुआती 30 दिनों के भीतर गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं का खतरा लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

डॉ. रंजन कामिल्या ने बताया कि सभी मरीजों को पूरे घुटने के प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं होती। ऐसे मामलों में यह नई तकनीक शरीर को कम नुकसान पहुंचाती है, ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है और मरीज तेजी से सामान्य जीवन में लौट सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के बाद मरीज पारंपरिक सर्जरी में लगने वाले 3 से 6 महीनों की बजाय केवल 4 से 6 सप्ताह में हल्की गतिविधियां और खेलकूद शुरू कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बदलती जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और जोड़ों पर बढ़ते दबाव के कारण अब कम उम्र के लोगों में भी घुटनों के दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वयस्कों में घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस की दर 22 से 39 प्रतिशत के बीच है, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में यह बढ़कर 44 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। ऐसे मरीजों के लिए यह तकनीक विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है।

यह कम चीरे वाली (मिनिमली इनवेसिव) सर्जरी ऑपरेशन के बाद दर्द को कम करने, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि घटाने और रिकवरी को तेज करने में मदद करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में पूरे घुटने के प्रत्यारोपण की आवश्यकता को लंबे समय तक टाला जा सकता है या कई मामलों में उससे बचा भी जा सकता है।

अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स कोलकाता का कहना है कि अत्याधुनिक सर्जिकल प्लानिंग और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मरीजों को व्यक्तिगत और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराकर उनकी गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना संस्थान की प्राथमिकता है।

Articles you may like: