भुवनेश्वर : ओडिशा सरकार के खेल एवं युवा सेवा विभाग ने राज्य की पैरा तीरंदाज पायल नाग को बैंकॉक में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी श्रृंखला 2026 में शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। पायल नाग ने इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ आगामी पैरा एशियाई खेलों के लिए भी क्वालीफाई किया है।
उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि को देखते हुए ओडिशा सरकार ने विशेष नकद पुरस्कार की घोषणा की। दो स्वर्ण पदक जीतने के लिए पायल नाग को 5,46,666 रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके अलावा भविष्य की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं की तैयारियों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से खेल उपकरणों की खरीद के लिए अतिरिक्त 3,23,100 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई।
सम्मान समारोह में ओडिशा के खेल एवं युवा सेवा मंत्री सूर्यवंशी सूरज, कांटाबांजी के विधायक लक्ष्मण बाग तथा खेल एवं युवा सेवा विभाग (डीएसवाईएस) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने पायल नाग को पैरा एशियाई खेलों और आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर खेल एवं युवा सेवा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने पायल नाग की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी सफलता ओडिशा और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि पायल का दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रेरणादायक है तथा यह ओडिशा में पैरा खेलों की बढ़ती ताकत और संभावनाओं को भी दर्शाता है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद पायल नाग ने राज्य सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस यादगार उपलब्धि के बाद ओडिशा लौटकर अपने लोगों के बीच आना उनके लिए बेहद खुशी की बात है।
पायल ने कहा कि ओडिशा सरकार, माननीय खेल मंत्री और कांटाबांजी के विधायक लक्ष्मण बाग से जो प्रोत्साहन और सहयोग उन्हें मिला है, वह उनके लिए बहुत मायने रखता है। उन्होंने कहा कि यह समर्थन उन्हें देश के लिए और अधिक मेहनत करने तथा बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देता है।
पायल नाग ने अपनी खेल यात्रा में सहयोग और सम्मान देने के लिए सभी का दिल से धन्यवाद भी व्यक्त किया और कहा कि वह भविष्य में भी देश का नाम रोशन करने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ प्रयास करती रहेंगी।
महज 8 साल की उम्र में हुई थी हादसे का शिकार
पायल नाग का जन्म ओडिशा के बालांगीर में एक प्रवासी मजदूर के घर हुआ था। News18 की मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जब पायल मात्र 8 साल की थी तब अनजाने में एक दिन उसके छोटे भाई ने घर की छत से एक कपड़ा बिजली के तार पर फेंक दिया और उसे लाने के लिए कहा।
उस तार से होकर उस समय 11,000 वोल्ट की बिजली प्रवाहित हो रही थी। इस बात से अंजान पायल लोहे के एक रॉड से कपड़ा उतारने की कोशिश करने लगी और तेज करंट की चपेट में आ गयी। हालांकि इस हादसे ने पायल नाग की जिन्दगी पूरी तरह से बदल कर रख दी लेकिन उसने हार नहीं मानी।
जम्मू में शुरू हुआ तीरंदाजी का सफर
हादसे ने भले ही पायल की जिंदगी बदल दी हो लेकिन इस जुझारू लड़की ने हार मानना नहीं सीखा। हादसे के बाद पायल नाग के माता-पिता बिजय और जनता को बालांगीर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने उनके गृह जिला में स्थित एक अनाथालय पार्बती गिरी बाल निकेतन में भेजने की सलाह दी थी।
जहां पायल ने अपने मुंह से पेंटिंग्स बनाना शुरू किया और इसे सोशल मीडिया पर शेयर करती थी। साल 2022 में कोच कुलदीप वेदवान की नजर उसपर पड़ी। वह पायल नाग को जम्मू के माता वैष्णो देवी आर्चरी अकादमी लेकर गए जहां उसका तीरंदाजी का प्रशिक्षण शुरू हुआ। उन्होंने पायल के लिए एक खास धनुष बनवाया जिसे उन्होंने शीतल देवी को भी इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।