पहले चरण का चुनाव लगभग शांतिपूर्ण तरीके से ही संपन्न हुआ। इस चुनाव में जहां बंगाल में रिकॉर्ड मतदान हुआ वहीं हिंसात्मक घटनाएं कम होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत से भी आयोग ने तारीफे बटोरी थी। अब बारी दूसरी अग्निपरीक्षा की है।
कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल की 142 सीटों पर विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होना है। इनमें जहां भवानीपुर जैसा हाईवोल्टेज विधानसभा केंद्र भी शामिल है।
शांतिपूर्ण चुनाव के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आयोग ने अपनी कमर कस ली है। दूसरे चरण के चुनाव से ठीक पहले शनिवार को CRPF के डीजी जीपी सिंह ने खुद जायजा लिया। इसके बाद रविवार को उन्होंने अपने X हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें दिखाई दे रही है आर्म्ड व्हीकल 'Beast' और 'Marksman'।
इसके साथ ही उन्होंने एक कैप्शन लिखा है जिसने भी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। अपने वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा है, 'Our strength, nemesis of the miscreants' यानी 'हमारी ताकत, अपराधियों का विनाश'।
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इस वीडियो में एक साथ कतार में खड़ी कई आर्म्ड व्हीकल दिखाई दे रही है। सूत्रों का दावा है कि दूसरे चरण के चुनाव से पहले तनावपूर्ण परिस्थिति को शांत बनाए रखने और केंद्रीय बल को तेजी के साथ एक्शन लेने में मदद पहुंचाने के लिए इन वाहनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बता दें, इस तरह की गाड़ियों का इस्तेमाल आमतौर पर कश्मीर या फिर माओवादी प्रभावित इलाकों में अधिक की जाती है।
Our strength, nemesis of the miscreants. pic.twitter.com/JVc5iWWWRX
— GP Singh (@gpsinghips) April 25, 2026
जानकारों का कहना है कि CRPF की यह आर्म्ड व्हीकल सामान्य गश्ती वाली गाड़ियों की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जाती है। केंद्रीय बल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दूसरे चरण के चुनाव में जिन मतदान केंद्रों और इलाकों को संवेदनशील के तौर पर चिन्हित किया गया है वहां 'एरिया डॉमिनेशन' अभियान चलाने के लिए 'बिस्ट' का इस्तेमाल किया जा सकता है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि शांतिपूर्ण तरीके से और हिंसामुक्त चुनाव करवाना ही आयोग का मुख्य लक्ष्य है। इसके आधार पर ही सभी जिलों में केंद्रीय बलों की उपस्थिति को बढ़ाया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में भी राज्य में 'बिस्ट' और 'मार्क्समैन' की तैनाती को लेकर काफी चर्चाएं होने लगी हैं। हालांकि तृणमूल ने पहले इन विशेष गाड़ियों को राज्य में लाने के बाद अपने बयान में कहा था कि यहां लोकतंत्र का उत्सव चल रहा है, युद्ध नहीं।
कुल मिलाकर सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हुई हैं कि क्या दूसरे चरण में बंगाल चुनाव का हिंसात्मक स्वरूप फिर से सामने आएगा या फिर पहले चरण की तरह शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हो सकेगा? यह तो 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान खत्म होने के बाद ही पता चल सकेगा।