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भीमबेटका में बन रहा देश का पहला ‘रॉक आर्ट इको पार्क म्यूज़ियम’

करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से, 1.12 हेक्टेयर भूमि पर इस म्यूज़ियम के निर्माण की योजना।

By सुपर्ण मुखोपाध्याय, Posted by: रजनीश प्रसाद

Feb 08, 2026 17:07 IST

भोपाल : प्राचीन मानव सभ्यता के जीवंत साक्ष्य के रूप में मध्य प्रदेश का भीमबेटका आज भी मौजूद है। लाखों वर्ष पहले के मानव जीवन, शिकार, उत्सव, आस्था और कला-साधना के मौन गवाह के रूप में पहाड़ों की चट्टानों पर अनेक शैलचित्र आज भी सुरक्षित हैं। इसी इतिहास को आम लोगों के और करीब लाने के लिए भीमबेटका में देश का पहला ‘रॉक आर्ट इको पार्क म्यूज़ियम’ बनने जा रहा है। यह पुरातत्व और शैलचित्र प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण केंद्र होगा।

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में भोपाल के पास स्थित यूनेस्को मान्यता प्राप्त भीमबेटका रॉक शेल्टर को नई पहचान देने के उद्देश्य से यह परियोजना मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा शुरू की गई है। लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से, 1.12 हेक्टेयर क्षेत्र में इस म्यूज़ियम के निर्माण की योजना बनाई गई है।

भीमबेटका का इतिहास सिर्फ एक गुफा या एक पहाड़ तक सीमित नहीं है। लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में फैले सात पहाड़ों पर 750 से अधिक रॉक शेल्टर मौजूद हैं। कहीं शिकार के दृश्य हैं, कहीं नृत्य-संगीत, तो कहीं धार्मिक अनुष्ठान और दैनिक जीवन के चित्र इन सबमें मानव इतिहास की एक लंबी निरंतरता दिखाई देती है। घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों के कारण कई क्लस्टरों तक आम पर्यटकों का पहुँचना काफी कठिन है लेकिन यह समस्या अब दूर होने वाली है।

प्रस्तावित रॉक आर्ट इको पार्क म्यूज़ियम में जाबरा, बिनायका, भोंरावाली, लाखा जुआर सहित विभिन्न दूरस्थ क्लस्टरों के दुर्लभ और अब तक अनदेखे शैलचित्रों की प्रतिकृतियाँ प्रदर्शित की जाएँगी। इससे पर्यटक एक ही स्थान पर भीमबेटका की कला और इतिहास का अनुभव कर सकेंगे।

इस म्यूज़ियम की सबसे खास बात इसका डिजाइन होगा। पारंपरिक कंक्रीट इमारतों की जगह अस्थायी और पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का उपयोग कर इस इको पार्क का निर्माण किया जाएगा। पहाड़, गुफाएँ और प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप तैयार की गई यह संरचना दर्शकों को भीमबेटका का वास्तविक अनुभव देगी। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के सचिव और पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक इलैया राजा टी ने मीडिया को बताया कि म्यूज़ियम में एआई और डिजिटल तकनीक के माध्यम से इतिहास को और अधिक जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। ध्वनि और प्रकाश के संयोजन से प्रागैतिहासिक मानव जीवन को दर्शाया जाएगा।

दूसरी ओर भीमबेटका से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित मध्य प्रदेश का सांची यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व धरोहर स्थल और प्राचीन बौद्ध तीर्थ सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अद्वितीय स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है। अपार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के बावजूद लंबे समय से सांची की उपेक्षा किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। हालिया केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों को केंद्र में रखकर एक नए बौद्ध सर्किट विकास परियोजना की घोषणा की गई है। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध मंदिरों और मठों के संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देना इस परियोजना का उद्देश्य है लेकिन इस सूची में मध्य प्रदेश का सांची शामिल नहीं है जबकि सांची को भारत के बौद्ध इतिहास के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।

पर्यटन क्षेत्र से जुड़े एक वर्ग का कहना है कि उत्तर-पूर्व भारत में बौद्ध सर्किट का विकास निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल है लेकिन सांची, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे ऐतिहासिक स्थलों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

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