पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान और इजरायल व अमेरिका के बीच युद्ध का असर अब भारत की रसोईयों पर पड़ने लगा है। पिछले कुछ दिनों से वाणिज्यिक कोलकाता समेत देश के कई बड़े शहरों में LPG सिलेंडर की आपूर्ति में समस्या पैदा होने की वजह से होटल-रेस्तरां प्रभावित हो रहे हैं।
कहीं मेन्यू को काट-छांट कर छोटा कर दिया जा रहा है तो कहीं खाद्य-पदार्थों का दाम बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प माना जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में अब कोलकाता व आसपास के क्षेत्र में मंदिर व आश्रमों में वितरित होने वाले निःशुल्क अथवा बहुत ही कम कीमतों पर भोग-प्रसाद पर भी असर पड़ने लगा है।
उत्तर कोलकाता के बागबाजार में मौजूद 'माएर बाड़ी' में अनिश्चित काल के लिए भोग-प्रसाद का वितरण स्थगित कर दिया गया है। बताया जाता है कि LPG सिलेंडर की आपूर्ति ठीक तरीके से नहीं होने की वजह से भोग वितरण को अनिश्चित काल के लिए स्थगित रखने का फैसला लिया गया है। साथ ही बताया गया है कि जैसे ही परिस्थिति फिर से स्वाभाविक हो जाती है, उसके बाद ही फिर से भोग का वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
इस बारे में निश्चित समय पर जानकारी भी दे दी जाएगी। बता दें, बागबाजार में माएर बाड़ी में श्री शारदा देवी वर्ष 1909 से 1920 तक रहा करती थी, जब उनकी मृत्यु हुई। Indian Express की मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि यहां प्रसाद व भोग का वितरण करने की परंपरा उसी समय से चलती आ रही है जब यहां शारदा मां रहा करती थी। वह खुद भक्तों के बीच भोग का वितरण किया करती थी। इससे पहले कोरोना काल में 'माएर बाड़ी' में भोग का वितरण बंद किया गया था। बताया जाता है कि यहां प्रतिदिन करीब 500 भक्त दर्शन करने आते हैं, जिसमें से 300-400 भक्त भोग अवश्य ग्रहण करते हैं।
दीघा में जगन्नाथ मंदिर ने भी LPG सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने की वजह से भोज-प्रसाद वितरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मंदिर के प्रधान पुरोहित व मंदिर ट्रस्ट कमेटी के सदस्य राधारमण दास ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मंदिर में भगवान को भोग लगाने के लिए बनने वाले पकवानों के साथ-साथ भक्तों में भी वितरित करने के लिए भोग बनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब से मंदिर में बैठकर भोग ग्रहण करने की व्यवस्था की गयी है, उसके बाद से ही भक्तों के बीच इसकी मांग भी काफी बढ़ गयी है। हर दिन हजारों भक्तों के लिए भोग पकाया जाता है।
उन्होंने बताया कि भगवान के लिए जो भोग पकाया जाता है, उसमें LPG सिलेंडर के साथ-साथ लकड़ी के चुल्हे का इस्तेमाल भी किया जाता है। प्रतिदिन 3 बार का भोग पकाने के लिए आमतौर पर 8 से 9 सिलेंडर की जरूरत होती है। इसलिए LPG सिलेंडर की आपूर्ति में समस्या के मद्देनजर मंदिर प्रबंधन ने फैसला लिया है कि अब दैनिक एक-डेढ़ हजारों भक्तों के लिए भोग-प्रसाद न बनाकर 150-200 भक्तों के लिए ही भोग बनाया जाएगा। परिस्थिति पर नजरें रखी गयी हैं। साथ ही मंदिर प्रबंधन ने आश्वस्त किया कि भगवान को चढ़ाया जाने वाला भोग बिल्कुल प्रभावित नहीं होगा। परिस्थिति सामान्य होने के बाद फिर से पहले की तरह ही भोग वितरित किया जाएगा।
नैहाटी की बड़ो मां के दर्शन करने सिर्फ उत्तर 24 परगना जिला ही नहीं बल्कि राज्य के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं लेकिन LPG सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से सोमवार से इस मंदिर में भक्तों में भोग वितरित न करने का फैसला लिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार आमतौर पर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार यानी सप्ताह में 3 दिन मंदिर परिसर में करीब 700 श्रद्धालुओं को भोग प्रसाद ग्रहण करवाया जाता है।
इसके साथ ही शनिवार और मंगलवार को लगभग 3000 भक्त निःशुल्क भोग ग्रहण करते हैं। मंदिर कमेटी की ओर से बताया जाता है कि इतनी भारी मात्रा में श्रद्धालुओं के लिए भोग पकाने के लिए पर्याप्त मात्रा में रसोई गैस उपलब्ध नहीं हो सकेगा। इसलिए जब तक परिस्थिति सामान्य नहीं हो जाती है, तब तक के लिए भोग-प्रसाद वितरण को बंद रखने का फैसला लिया गया है।