🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

SSC भर्ती घोटाला में ईडी ने पूर्व शिक्षा सचिव को तलब किया

जांच अधिकारियों की नजर अब सिर्फ निचले स्तर के एजेंटों तक सीमित नहीं।

कोलकाताः केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में राज्य के पूर्व शिक्षा सचिव मनीष जैन और हुगली के बहिष्कृत तृणमूल नेता कुंतल घोष को तलब किया है। ईडी (ED) सूत्रों के अनुसार, दोनों को अगले सप्ताह सीजिओ कॉम्प्लेक्स में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बार जांच केवल निचले स्तर के ‘एजेंटों’ तक सीमित नहीं है। ईडी का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि भर्ती घोटाले का ‘ऑपरेशन’ सरकारी विभागों के गलियारों से किस प्रकार नियंत्रित और संचालित होता रहा। पूर्व शिक्षा सचिव मनीष जैन से पहले भी CBI ने पूछताछ की थी। हालांकि ईडी के सामने उनकी यह पहली पेशी होगी। अधिकारी विशेष रूप से यह समझना चाहते हैं कि भर्ती घोटाले में आर्थिक लेन-देन का नक्शा कैसे तैयार हुआ और किनके निर्देश पर फाइलें आगे बढ़ाई गईं।

हालांकि कुंतल घोष को शुरुआती चरण में जमानत मिल चुकी है, लेकिन ईडी यह जांच करना चाहती है कि SSC भर्ती में धन संग्रह में उनकी भूमिका क्या थी। अधिकारियों का लक्ष्य है कि मनीष जैन और कुंतल घोष के बयानों की तुलना करके पूरे वित्तीय रूट मैप को समझा जाए।

इस महीने ईडी ने इस केस की जांच के लिए पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी से पूछताछ की तैयारी पूरी कर ली है। उन्हें क्रमशः 16 और 18 मार्च को अधिकारियों का सामना करना पड़ सकता है। मनीष जैन से यह भी पूछा जाएगा कि क्या उनके पास किसी विशेष अपॉइंटमेंट लिस्ट की जानकारी थी और किसके कहने पर फाइलें आगे बढ़ाई गईं।

सूत्रों के मुताबिक, केवल ये चार नाम ही नहीं हैं। ईडी ने अगले कुछ दिनों में शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों को भी तलब करने की लिस्ट तैयार की है। उन्हें चरणबद्ध तरीके से बुलाया जाएगा और भर्ती घोटाले में शामिल वित्तीय लेन-देन और फाइल संचालन की पूरी प्रक्रिया को समझा जाएगा।

गौरतलब है कि ईडी ने जुलाई 2022 में प्रारंभिक भर्ती मामले में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद SSC भर्ती घोटाले की जांच में एजेंसी की सक्रियता और बढ़ गई।

इस जांच का उद्देश्य केवल आरोपियों को पकड़ना नहीं है। ईडी यह समझना चाहती है कि SSC भर्ती घोटाला शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों के नेटवर्क के जरिए किस प्रकार संचालित हुआ। इस मामले में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रियाओं की संवैधानिकता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

जांच में शामिल अधिकारियों और उनके पूर्व पदों को देखते हुए यह मामला राज्य और केंद्र के बीच संबंधों पर भी असर डाल सकता है। ईडी यह देख रही है कि भर्ती घोटाले की संरचना, फाइलों का संचालन और पैसों का लेन-देन किस तरह विभागीय अधिकारियों और एजेंटों के नेटवर्क के माध्यम से हुआ।

इस पूरे मामले से यह स्पष्ट हो गया है कि SSC भर्ती घोटाला केवल एजेंटों तक सीमित नहीं था। इसमें उच्च अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों की भी भूमिका थी।

Prev Article
काले बादलों ने घेरा बंगाल का आसमान, कई जिलों में बारिश और बिजली गिरने की आशंका
Next Article
ऑफिस जाते समय छाता लेकर निकले या नहीं? क्या कहता है बारिश को लेकर मौसम का पूर्वानुमान?

Articles you may like: