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जस्टिस डॉ. राधाबिनोद पाल के पोते ने सड़क का नाम बदलने में अभिषेक बनर्जी की भूमिक की तारीफ की

जस्टिस डॉ. राधाबिनोद पाल की 140वीं जयंती पर उनके पोते सुधि बिनोद पाल ने बताया कि कैसे कोलकाता में न्यायविद को सम्मानित किया जा रहा है और शिक्षा के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता कैसी थी!

By Shubham Ganguly, Posted By : Moumita Bhattacharya

Jan 27, 2026 21:01 IST

जस्टिस डॉ. राधाबिनोद पाल की 140वीं जयंती 27 जनवरी को मनायी जा रही है। वह एक जाने-माने भारतीय न्यायविद थे जिनके टोक्यो युद्ध अपराध ट्रायल्स में दिए गए असहमति वाले फैसले ने उन्हें दुनिया भर में सम्मान और हमेशा के लिए पहचान दिलाई।

इस खास मौके पर उनके पोते सुधी बिनोद पाल से खास बातचीत हुई जिसमें उन्होंने बताया कि आज के खास दिन पर उनके दादाजी को कैसे सम्मानित किया जा रहा है? घर पर वे कैसे इंसान थे और वह निजी यादें जो आज भी उनकी विरासत को आकार दे रही हैं।

कोलकाता में जस्टिस पाल को सम्मान

पश्चिम बंगाल में हाल ही में मिली पहचान के बारे में बात करते हुए सुधी बिनोद पाल ने बताया कि कोलकाता की एक बड़ी सड़क का नाम जस्टिस पाल के नाम पर रखा गया है। इसे उन्होंने जस्टिस पाल के योगदान की एक सार्थक पहचान बताया।

उन्होंने कहा, "सड़क का नाम अगस्त 2025 में बदला गया।" "उससे पहले 2024 में WBNUJS ने जस्टिस पाल के नाम पर एक चेयर और एक स्कॉलरशिप शुरू की जिसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 करोड़ रुपये दिए। उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की मूर्ति के साथ डॉ. राधाबिनोद पाल की एक आवक्ष मूर्ति भी लगाई।"

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इसके बाद उन्होंने याद करते हुए बताया कि कैसे एक व्यक्तिगत अपील से तुरंत कार्रवाई हुई। "जब अभिषेक बनर्जी जापान गए तो उन्होंने यासुकुनी श्राइन का दौरा किया। उन्होंने फेसबुक पर इसकी तस्वीर भी पोस्ट की थी और मैंने अपने दादाजी के नाम पर एक सड़क का नाम रखने का अनुरोध करते हुए उस पोस्ट पर कमेंट किया था। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया और मुझसे कुछ सड़कों के नाम सुझाने के लिए कहा।"

शुरुआत में परिवार के मन में कोई दूसरी जगह थी। "हम शुरू में चाहते थे कि बिडन स्ट्रीट का नाम उनके नाम पर रखा जाए लेकिन बाद में हमने सोचा कि हाई कोर्ट के पास एस्प्लेनेड रो ज्यादा सही रहेगा।"

"अभिषेक बनर्जी के ऑफिस ने KMC से कहा कि वे मुझसे संपर्क करें और तीन महीने के अंदर सड़क का नाम बदल दिया गया। यह पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से किया गया दूसरा अच्छा काम था," उन्होंने कहा।

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कोर्टरूम से अलग जस्टिस पाल

उनके पोते ने बताया कि सार्वजनिक जीवन और कोर्टरूम से दूर जस्टिस पाल शिक्षा और सामाजिक सुधार में बहुत ज्यादा दिलचस्पी रखते थे।

सुधी बिनोद पाल ने कहा, "जिन लोगों के पास उच्च शिक्षा प्राप्त करने के साधन नहीं थे उनके लिए जस्टिस पाल बहुत नरम दिल इंसान थे।" "जब से उन्होंने रुपए कमाना शुरू किया तब से वह हर उस व्यक्ति की मदद करते थे जो उनसे मदद मांगने आते थे।"

उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा हमेशा उनके दादाजी की प्राथमिकता रही है। "शिक्षा उनका मुख्य फोकस था और मेरे दादाजी यह पक्का करते थे कि हर कोई सफल हो।"

यह विश्वास उनके परिवार में भी दिखता है। उन्होंने कहा, "उनके अपने बच्चे भी बहुत सफल हुए थे।"

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