नयी दिल्ली/कोलकाताः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक हालिया संबोधन को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। यह संबोधन सरकारी प्रसारण माध्यमों के जरिए प्रसारित किया गया, जिसे लेकर वाम दलों ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि इस प्रसारण के माध्यम से चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन किया गया।
महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों में वृद्धि से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक के खारिज होने के बाद प्रधानमंत्री ने शनिवार रात दूरदर्शन और आकाशवाणी के माध्यम से देश को संबोधित किया। इसी भाषण को वाम दलों ने पूरी तरह राजनीतिक करार देते हुए इसे आदर्श आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन बताया है।
दो प्रमुख वाम दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी आचार संहिता लागू होने के बावजूद प्रधानमंत्री ने सरकारी मंच का उपयोग कर विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक संदेश दिया।
संतोष कुमार ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि ‘संसद टीवी’ और दूरदर्शन जैसे सरकारी मंचों का इस्तेमाल कर चुनावी प्रतिस्पर्धा को असमान बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आयोग इस पर कार्रवाई नहीं करता तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे।
इसी मुद्दे पर एम. ए. बेबी ने केरल के कोल्लम में प्रेस वार्ता करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में खोया बहुमत वापस पाने के लिए आरएसएस-भाजपा महिला बिल को एक रणनीतिक मुद्दे के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
एम. ए. बेबी ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि इसका उद्देश्य दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के प्रभाव को कम कर भाजपा शासित क्षेत्रों की ताकत बढ़ाना है। उन्होंने इसे ‘हिंदू राष्ट्र’ की दिशा में एक कदम बताया।
साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में एक चुनावी सभा के दौरान अमित शाह के उस बयान की भी आलोचना की, जिसमें समान नागरिक संहिता लागू करने और बहुविवाह पर रोक लगाने की बात कही गई थी। एम. ए. बेबी के अनुसार यह बयान धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिया गया।
इस पूरे मामले में ममता बनर्जी ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का मामला बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अपने राजनीतिक हितों के लिए सरकारी मंचों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तृणमूल कांग्रेस भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराएगी।
कुल मिलाकर लोकसभा में संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित न होने और उसके बाद दिए गए प्रधानमंत्री के संबोधन को लेकर विपक्षी दल एकजुट होते दिख रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत निर्वाचन आयोग इस मामले में क्या कदम उठाता है, खासकर तब जब पहले भी चुनावी आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों पर आयोग की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।