नई दिल्ली: डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) सोमवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एक चैटबॉट लॉन्च करने जा रहा है। यह चैटबॉट लोगों को उनके पास आए नोटिस की सत्यता जांचने में मदद करेगा।
‘अभय’ चैटबॉट से नोटिस की होगी जांच
इस चैटबॉट का नाम ‘अभय’ रखा गया है, जिसे भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा 22वें डी पी कोहली मेमोरियल लेक्चर के अवसर पर लॉन्च किया जाएगा। यह कार्यक्रम सीबीआई के संस्थापक निदेशक डीपी कोहली की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश इस अवसर पर ‘साइबर अपराध की चुनौतियां-पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान भी देंगे और 24 उत्कृष्ट सेवा पदक भी प्रदान करेंगे।
सीबीआई के अनुसार, ‘अभय’ चैटबॉट आम लोगों को यह जांचने की सुविधा देगा कि कोई नोटिस वास्तव में सीबीआई द्वारा जारी किया गया है या नहीं। डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में यह नागरिकों के लिए एक उपयोगी और जरूरी उपकरण साबित होगा।
ठग बन रहे अधिकारी, करोड़ों की ठगी
सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि कई मामलों में ठग खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर फर्जी नोटिस दिखाते हैं और लोगों को डराकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बंधक बनाते हैं। इसके जरिए वे पीड़ितों से करोड़ों रुपये वसूल लेते हैं।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह की साइबर ठगी पर चिंता जताई थी और बताया था कि विभिन्न घोटालों में करीब 54,000 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है, जिसे अदालत ने ‘लूट या डकैती’ करार दिया।
डीपी कोहली मेमोरियल लेक्चर की परंपरा
साल 2000 से आयोजित हो रहे इस मेमोरियल लेक्चर में कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व अपने विचार रख चुके हैं। सीबीआई के अनुसार डीपी कोहली का जन्म 1907 में उत्तर प्रदेश में हुआ था और उन्होंने 1931 में पुलिस सेवा जॉइन की थी। उन्होंने 1955 से दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट का नेतृत्व किया और 1 अप्रैल 1963 को सीबीआई की स्थापना के बाद इसके पहले निदेशक बने। उन्होंने 1968 तक इस पद पर सेवाएं दीं। यह लेक्चर कानून प्रवर्तन, आपराधिक न्याय प्रणाली और जांच से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है, जहां विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने विचार साझा करते हैं और आधुनिक पुलिसिंग तथा जवाबदेही की समझ को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।