नई दिल्ली : दिल्ली में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। यह मामला वर्ष 2003 में रामावतार जग्गी जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता थे उनकी हत्या से जुड़ा है। अमित जोगी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र हैं।
हाल ही में उच्च न्यायालय ने इस मामले में अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उन्हें जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इससे पहले 31 मई 2007 को ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष 28 आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा है। हालांकि उसी फैसले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी को आरोपों से बरी कर दिया गया था। यह पार्टी उनके दिवंगत पिता अजीत जोगी द्वारा स्थापित की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई शामिल थे उन्होनें अमित जोगी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं विवेक तंखा और कपिल सिब्बल की दलीलों पर विचार किया। इसके बाद अदालत ने उनकी सजा और दोषसिद्धि पर रोक लगा दी।
वहीं पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और गोपाल शंकरनारायणन ने इन दलीलों का विरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने के साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को नोटिस भी जारी किया है। यह नोटिस अमित जोगी द्वारा दायर याचिका पर जारी किया गया जिसमें उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई दोबारा शुरू की थी। यह कारवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की गई थी जो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की अपील के बाद सामने आया था।
शुरुआत में इस मामले की जांच राज्य पुलिस द्वारा की गई थी लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कई आरोपियों के साथ अमित जोगी का नाम भी शामिल किया था।
रामावतार जग्गी की 4 जून 2003 को हत्या कर दी गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजीत जोगी थे।