मुकुल राय तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के लंबे समय राजनैतिक साथी रहे हैं। कांग्रेस (Congress) से अलग होकर जब ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के गठन का फैसला लिया था, उस समय मुकुल राय (Mukul Roy) उन चुनिंदा नेताओं में से थे जिन्होंने उनका साथ दिया था।
इसके बाद सिंगुर-नंदीग्राम का आंदोलन से लेकर कई महत्वपूर्ण समय में ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मुकुल राय खड़े रहे थे। धीरे-धीरे मुकुल राय तृणमूल सुप्रीमो के भरोसे और सबसे करीबी नेताओं में शामिल हो गए थे।
भाजपा में 3 साल का समय बिताकर जब मुकुल राय की तृणमूल में 'घर वापसी' हुई थी, उस समय भी ममता बनर्जी ने कहा था, 'मुकुल का किसी के साथ मतविरोध नहीं था।' उन्हीं मुकुल राय के निधन पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शोक व्यक्त किया है। सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने मुकुल राय के बेटे शुभ्रांशु राय के साथ खड़े होने का आश्वासन भी दिया था। अपने आधिकारिक X हैंडल पर ममता बनर्जी ने पोस्ट किया है।
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— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) February 23, 2026
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अपने पोस्ट में ममता बनर्जी ने लिखा है, 'वरिष्ठ राजनैतिक व्यक्तित्व मुकुल राय के अचानक निधन की खबर से मैं विचलित और शोक-स्तब्ध महसूस कर रही हूं। वह मेरे लंबे समय के राजनैतिक सहकर्मी थे, कई राजनैतिक युद्धों में वह मेरे सहयोद्धा भी रह चुके हैं। उनके मृत्यु की खबर ने मुझे वेदना से भर दिया है।'
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ममता बनर्जी ने आगे लिखा है कि स्वर्गीय मुकुल राय तृणमूल के गठन के शुरुआत से ही जुड़े रहे हैं। वह केंद्रीय मंत्री भी बने थे, पार्टी के सभी स्तरों पर उन्हें स्वीकार किया जाता था। बाद में भले ही उन्होंने अलग रास्ता चुना था लेकिन वह वापस भी लौट आए थे। बंगाल की राजनीति में उनके योगदानों और सांगठनिक दक्षता को भुलाया नहीं जा सकता है। राजनैतिक हलकों में हर पार्टी उनकी कमी को महसूस करेगा। इस अनुभवी नेता, सहकर्मी के परिवार और समर्थकों के प्रति मैं आंतरिक संवेदना व्यक्त करती हूं।
मुकुल राय के बेटे शुभ्रांशु राय के बारे में उन्होंने लिखा है, 'शुभ्रांशु से कहूंगी, दिल को मजबूत बनाए। इस संकट की घड़ी में हम तुम्हारे साथ हैं।'