उनके तेज दिमाग की वजह से ही राजनैतिक जानकार मुकुल राय की तुलना 'चाणक्य' से किया करते थे। विरोधी भी उनसे बात करते समय सोच-समझकर ही शब्दों का चयन किया करते थे लेकिन जीवन के आखिरी कुछ वर्षों में वह राजनीति से पूरी तरह से अलग हो गए थे। अपनी राजनैतिक उपलब्धियों, अपनी राजनैतिक पहचान तक को याद करने में उन्हें मुश्किलें आती थी। पिछले लगभग 600 दिनों से चल रही जंग सोमवार की देर रात को खत्म हो गयी।
कोलकाता के एक निजी अस्पताल में राजनीति में तृणमूल के 'चाणक्य' कहलाने वाले मुकुल राय ने 73 वर्ष की आयु में अपनी आखिरी सांस ली। बेटे शुभ्रांशु राय ने पिता के निधन की पुष्टि की।
तृणमूल के गठन से ही रहे साथ
मुकुल राय उन चुनिंदा नेताओं में एक हैं जो ममता बनर्जी के नेतृत्व में बनी तृणमूल कांग्रेस के गठन के समय से ही उसके साथ रहे हैं। एक समय ऐसा भी जब उन्हें तृणमूल का सेकेंड-इन-कमांड कहा जाता था। बंगाल की राजनीति में मुकुल एक शक्तिशाली चरित्र रहे हैं। उनके निधन से राज्य के राजनैतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गयी है।
मुकुल राय भले ही तृणमूल के साथ शुरुआत से ही जुड़े हुए थे लेकिन वर्ष 2017 में हवा ने अपना रुख बदला। आधिकारिक तौर पर वह भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2021 का विधानसभा चुनाव भी उन्होंने भाजपा की टिकट से ही लड़ा था लेकिन बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में वापस लौट आए।
पिछले लंबे समय से चल रहे थे बीमार
मुकुल राय पिछले लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधित विभिन्न परेशानियों से जुझ रहे थे। उनके बेटे शुभ्रांशु राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले लगभग डेढ़ सालों से उनके पिता अस्पताल में भर्ती थे। उनकी शारीरिक स्थिति लगातार गिरती जा रही थी। उन्होंने बताया कि रात को लगभग 1 बजे मुकुल राय को मैसिव कार्डियक अरेस्ट हुआ। इसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। सोमवार की भोर में लगभग 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। शुभ्रांशु ने कहा कि पिता बहुत तकलीफ में थे। वह अपनी जिंदगी का आखिरी युद्ध हार गए।
Read Also | पूर्व मंत्री मुकुल राय का निधन, राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर, आज अंतिम संस्कार
पिछले लंबे समय से उनकी बीमारी ने उनके करीबियों और परिजनों को चिंता में डाल दिया था। यह बात 23 जनवरी को उनके बेटे शुभ्रांशु राय के एक सोशल मीडिया पोस्ट से ही पता चलता है। शुभ्रांशु राय ने अपने पिता के जन्म दिन के मौके पर सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, "Many Many Happy Returns of The Day. और कुछ नहीं लिख पा रहा हूं, क्योंकि आप असहनीय कष्ट में हैं। मुझसे देखा नहीं जा रहा है।"
शुभ्रांशु राय ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव कांचरापाड़ा में ही किया जाएगा। इस बारे में वह पार्टी के साथ भी जरूर बात करेंगे।
राजनैतिक गलियारों में शोक की लहर
कृष्णनगर उत्तर के विधायक व तेज-तर्रार राजनैतिक व्यक्तित्व के धनी मुकुल राय के निधन से उनके सहयोगियों, जान-पहचान के लोगों और राजनीति में उनके साथ कदमताल मिलाने वाले सभी लोगों के मन इस वक्त भर गया है। हर पार्टी के राजनेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। लंबे समय तक उनके साथ काम कर चुके राज्य के कृषि मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि मुकुल राय मेरे पुराने सहकर्मी रहे हैं।
तेज दिमाग के धनी वह पार्टी के एक नेता थे। ममता बनर्जी के नेतृत्व में कई आंदोलनों ने वह कंधे से कंधा मिलाकर चले हैं। उनके बेटे ने उन्हें स्वस्थ करने की बहुत कोशिशें की लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। शायद ऐसा भी कोई दिन आता है। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।
CPM के केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने अपने शोक संदेश में कहा कि पिछले डेढ़-दो सालों से वह बहुत ज्यादा बीमार थे। वह इतना ज्यादा बीमार थे कि आखिरी कुछ सालों से उन्हें देखकर बहुत बुरा लगता था। किसी की भी मौत हमेशा वेदनादायक ही होती है। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।
भाजपा में उनके साथ बहुत कम समय ही लेकिन महत्वपूर्ण समय बिताने वाली लॉकेट चट्टोपाध्याय ने कहा कि इतने बड़े कद के एक व्यक्ति का दुनिया से चले जाना दिल स्वीकार नहीं कर पा रहा है। मुकुल दा (राय) के साथ मैंने काम किया है। बहुत कुछ सीखा है। जीवन के आखिरी पड़ाव पर उनको देखकर बहुत दुःख होता था। दिल भर आता था। लेकिन इतनी जल्दी उनका चले जाना मान नहीं पा रही हूं। हमने एक वरिष्ठ राजनैतिक जानकार को खो दिया।