कोलकाताः कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है और साफ कर दिया है कि मामले की जांच जारी रहेगी। हालांकि अदालत ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई करने से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा।
यह मामला चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ धमकी जैसे शब्दों के इस्तेमाल से जुड़ा है। इसी शिकायत के आधार पर 15 मई को बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और अगर वह सहयोग नहीं करते हैं तो पुलिस इसकी जानकारी अदालत को दे सकती है। अदालत ने यह भी साफ किया कि फिलहाल उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है, लेकिन बिना अदालत की अनुमति के उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जा सकता। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि वह अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर यात्रा नहीं कर पाएंगे।
अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि किसी राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक नेता के खिलाफ इस तरह के आरोप गंभीर हैं और चुनावी माहौल में दिए गए बयानों के असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए जांच को पूरी सावधानी और नियमों के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।
यह पूरा मामला 15 मई को दर्ज हुई एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अभिषेक बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ टिप्पणी की और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा उन पर चुनावी सभा के दौरान लोगों को उकसाने का भी आरोप है। अब इस मामले में जांच आगे बढ़ेगी, लेकिन सभी कार्रवाई अदालत की निगरानी और अनुमति के दायरे में ही होगी।