नई दिल्ली : संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की बैठक में गुरुवार को केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को आगे बढ़ाने और देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने बैठक के बाद बताया कि पैनल ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने, वैश्विक बाजार तक पहुंच और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
नई दिल्ली में बैठक के बाद निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति ने इस बात पर चर्चा की कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को किस तरह और आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने वर्ष 2015 में सूचना प्रौद्योगिकी समझौता-2 (आईटीए-2) पर हस्ताक्षर नहीं किए, ताकि देश के घरेलू हितों की रक्षा की जा सके।
निशिकांत दुबे ने कहा कि आईटीए-1 के बाद भारत ने आईटीए-2 में शामिल होने का फैसला नहीं किया। समिति की चर्चा में रोजगार और विश्व बाजार से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी गई।
केंद्र सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को की थी। इस पहल का उद्देश्य देश में निवेश को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और भारत को विनिर्माण एवं नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
बैठक के दौरान समिति ने दूरसंचार क्षेत्र और डिजिटल सेवाओं से जुड़े उपभोक्ता अधिकारों पर भी चर्चा की। निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति यह भी देख रही है कि क्या टेलीकॉम कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म कुछ खास श्रेणी के उपयोगकर्ताओं, जैसे पोस्टपेड ग्राहकों या भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को प्राथमिकता वाली सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने नेट न्यूट्रैलिटी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि देश की 140 करोड़ आबादी को इंटरनेट इस्तेमाल करने में समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समानता का अधिकार संविधान में निर्धारित है और इंटरनेट उपयोग करने वाले सभी लोगों को उपभोक्ता संरक्षण के तहत बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए।
निशिकांत दुबे ने कहा कि नेट न्यूट्रैलिटी एक महत्वपूर्ण विषय है और सभी इंटरनेट उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना जरूरी है। समिति इस बात पर ध्यान दे रही है कि डिजिटल सेवाओं में किसी तरह का भेदभाव न हो।
इससे पहले 17 जून को संसदीय स्थायी समिति की बैठक में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने ‘प्रसार भारती संगठन के कामकाज की समीक्षा’ विषय पर समिति को जानकारी दी थी।
वहीं पिछले महीने समिति को संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के प्रतिनिधियों ने दूरसंचार क्षेत्र में सेवा गुणवत्ता मानकों (क्यूओएस) और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर जानकारी दी थी। इसमें दूरसंचार विभाग से संबंधित नेट न्यूट्रैलिटी के विषय पर भी विशेष चर्चा हुई थी।