हैदराबादः हैदराबाद में राज्य संचालित उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल में प्रथम वर्ष के एक पीजी मेडिकल छात्र ने गुरुवार को अपने हॉस्टल कमरे में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार मृतक 26 वर्षीय छात्र जनरल सर्जरी विभाग से जुड़ा हुआ था और अनुसूचित जनजाति समुदाय से आता था।
परिजनों का आरोप है कि उसने अत्यधिक काम के दबाव के कारण यह कदम उठाया। उनका कहना है कि सीनियर डॉक्टरों और विभागाध्यक्ष की ओर से लंबे समय तक काम कराया जा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान था। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। घटना के बाद परिवार और अन्य लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी के साथ-साथ पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की।
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि छात्र ने अधिक मात्रा में दवाइयों का सेवन किया था। मौके से एक इंजेक्शन भी बरामद किया गया है, जिसे जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए हेल्थकेयर रिफॉर्म्स डॉक्टर्स एसोसिएशन (एचआरडीए), तेलंगाना ने कहा कि यह मामला चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन पर ध्यान देने की जरूरत को उजागर करता है। संगठन ने बताया कि खासकर पीजी स्तर के डॉक्टरों को लंबे कार्य घंटे, भारी दबाव और उच्च अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है, जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
एचआरडीए ने यह भी जोर दिया कि इस क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत को प्रोत्साहित करने और समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता तथा काउंसलिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच की जा रही है।