SIR की प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में लोगों का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। हालांकि वैध मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच के लिए ट्राइब्यूनल अपना काम कर रही है लेकिन क्या ये मतदाता बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में अपना वोट दे सकेंगे? क्या जिन मतदाताओं को ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिल जाएगी वे 23 और 29 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे? इन सवालों का आज (16 अप्रैल 2026) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जवाब दे दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की 142 नंबर अनुच्छेद के आधार पर अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए कहा है कि 21 और 27 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल में जिन मतदाताओं को मंजूरी मिल जाएगी, उसकी सूची चुनाव आयोग को जारी करनी होगी। जिन मतदाताओं को 21 अप्रैल तक मंजूरी दे दी जाएगी, वे 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले चरण और 27 अप्रैल तक मंजूरी पाने वाले मतदाता विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण 29 अप्रैल को अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने SIR के मामले में संविधान की अनुच्छेद संख्या 142 का इस्तेमाल किया है। बता दें, भारतीय संविधान की अनुच्छेद संख्या 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को कई अधिकार दिए जाते हैं। इस अनुच्छेद का इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट कानून की सीमा से परे न्याय के लिए कोई भी फैसला ले सकता है। एक प्रकार से इसे संविधान द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दिया गया 'ब्रह्मास्त्र' माना जा सकता है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इसी अनुच्छेद का प्रयोग कर ज्यूडिशियल अधिकारियों की नियुक्ति की थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने कलकत्ता हाई कोर्ट को 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' के मामले में अंतिम निर्णय लेने के लिए ज्यूडिशियल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया था। यह निर्देश देते समय भी सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के इस अनुच्छेद का ही इस्तेमाल किया था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से अपना ब्रह्मास्त्र निकाला है और इसके आधार पर ही फैसला सुनाया है कि 21 और 27 अप्रैल तक अगर ट्रिब्यूनल में 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' मामले का निपटारा हो जाता है तो मतदाता विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकता है।