🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

निपाह वैक्सीन: सफल ट्रायल, क्या जल्द ही उपलब्ध होगी?

दो खुराक में विकसित सुरक्षा प्रतिरोधक क्षमता

By अनिर्बाण घोष, Posted by: प्रियंका कानू

Jan 22, 2026 17:37 IST

संक्रमण फैलने से ज्यादा चिंता निपाह वायरस में मृत्युदर को लेकर है। संक्रमितों में 40-75 प्रतिशत को बचाया नहीं जा सकता। ऐसे घातक निपाह वायरस के लिए एक और वैक्सीन जल्द ही उपलब्ध होने की संभावना बनी है। पश्चिम बंगाल में दो नर्सों के निपाह संक्रमित होने से लगभग तीन हफ्ते पहले 2020-2021 तक चली निपाह वैक्सीन के पहले चरण के क्लिनिकल ट्रायल के परिणाम ‘द लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित हुए।

एम-आरएनए श्रेणी की इस वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल अमेरिका के सिनसिनाटी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने किया है। फरवरी 2020 से अक्टूबर 2021 के बीच 18 से 49 वर्ष आयु के 192 लोगों पर फेज-1 ट्रायल पूरा किया गया। इसके नतीजे शोध पत्र के रूप में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में द लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। शोध में दावा किया गया है कि 28 दिनों के अंतराल पर दी गई दो खुराकों वाली यह वैक्सीन प्रारंभिक चरण के परीक्षणों में सुरक्षित पाई गई और मानव शरीर में प्रभावी रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में सक्षम रही। इस पृष्ठभूमि में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस वैक्सीन का स्वागत किया है।

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि वैक्सीन की सभी खुराकें सुरक्षित और सहनीय थीं। अधिकांश मामलों में दुष्प्रभाव केवल इंजेक्शन की जगह पर हल्के से मध्यम दर्द तक सीमित रहे। किसी भी गंभीर दुष्प्रभाव, अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिन स्वयंसेवकों ने 100 माइक्रोग्राम मात्रा में वैक्सीन की दोनों खुराकें लीं, उनके शरीर में सबसे मजबूत न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी विकसित हुईं। दूसरी खुराक के एक महीने के भीतर एंटीबॉडी का स्तर काफी बढ़ गया और लंबे समय तक बना रहा। हालांकि केवल एक खुराक लेने पर रोग-प्रतिरोधक क्षमता तुलनात्मक रूप से कम पाई गई।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अंतर्गत पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (आईसीएमआर-एनआईवी) के विशेषज्ञों ने इस शोध को निपाह वैक्सीन के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उनके अनुसार, बड़े स्तर पर इसकी प्रभावशीलता की जांच के लिए जल्द से जल्द फेज-2 ट्रायल शुरू करना आवश्यक है। इसी तरह की राय सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ पर्णाली धर चौधरी ने भी व्यक्त की है। उनके शब्दों में, यह निस्संदेह एक अत्यंत संभावनाशील प्रयास है। हालांकि एक वायरल वेक्टर आधारित निपाह वैक्सीन का फेज-2 ट्रायल पहले ही शुरू हो चुका है इसलिए उस दृष्टि से यह शोध थोड़ा पीछे है। फिर भी, पहले चरण के ट्रायल में यह वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी प्रतीत होती है।

1998 में मलेशिया में निपाह वायरस की पहली पहचान हुई थी। इसके बाद दुनिया के कई देशों में, खासकर बांग्लादेश और भारत में पश्चिम बंगाल सहित, समय-समय पर इसका प्रकोप देखा गया है। हालांकि किसी भी बार बड़ी संख्या में लोग संक्रमित नहीं हुए। निपाह की मृत्यु दर इतनी अधिक है कि संक्रमण फैलना शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद वायरस को टिके रहने के लिए उपयुक्त मेजबान शरीर नहीं मिल पाता इसलिए संक्रमण लंबे समय तक नहीं चलता। ऐसा पर्णाली का मानना है कि मरीजों की संख्या कम होना और उनमें से बड़ी संख्या का मृत्यु को प्राप्त होना निपाह वैक्सीन के विकास में एक बड़ी बाधा माना जाता है।

कुछ वर्गों में यह सवाल भी उठता है कि जब निपाह से बहुत कम लोग संक्रमित होते हैं, तो फिर वैक्सीन की जरूरत क्या है। हालांकि चिकित्सा जगत के अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस ट्रायल के आगामी चरण सफल होते हैं, तो यही वैक्सीन निपाह के खिलाफ पहली प्रभावी रोकथाम का हथियार बन सकती है और कई जानें बचा सकती है। संक्रामक रोग विशेषज्ञ योगीराज राय याद दिलाते हैं कि निपाह के लिए न तो कोई प्रभावी स्थापित इलाज है और न ही कोई प्रतिषेधक। वैक्सीन आने से इस घातक वायरस को रोकने का कम से कम एक उपाय जरूर मिलेगा।

वायरोलॉजी विशेषज्ञ सिद्धार्थ जोआरदार का ऐसा मानना है कि सभी चरणों में सफलता मिलने के बाद भी इस वैक्सीन को पूरी आबादी को देने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, जो लोग चमगादड़ों के संपर्क में आते हैं, फल या फलों का रस एकत्र करते हैं, खजूर का रस निकालने वाले, वनकर्मी, तथा डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी जो अक्सर अज्ञात बुखार के मरीजों के संपर्क में आते हैं, यदि इन उच्च जोखिम वाले समूहों को वैक्सीन दी जाए तो बड़े खतरे को टाला जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी क्षेत्र में निपाह के प्रकोप की खबर मिलते ही संक्रमण पर नियंत्रण के लिए इस वैक्सीन का आपातकालीन उपयोग भी किया जा सकता है।

Next Article
भारत में 40 प्रतिशत लोग फैटी लिवर से पीड़ित, कौन से 5 खाद्य पदार्थ कम करेंगे समस्या

Articles you may like: