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खाने के तुरंत बाद लेट जाते हैं? क्या आप जानते हैं कि यह आपके शरीर पर क्या असर डालता है?

चिकित्सकों के अनुसार, खाने के तुरंत बाद बैठने की यह आदत लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर पर धीरे-धीरे कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। क्या हो सकता है, आप जानते है?

By सायन कृष्ण देव, Posted by: प्रियंका कानू

Feb 05, 2026 15:50 IST

अधिकांश लोग खाना खाने के बाद पेट भरा होने पर आराम के लिए बैठ जाते हैं, सोफे पर झुककर, बिस्तर पर आधा लेटकर या मोबाइल हाथ में लेकर। ऐसा लगता है कि दिनभर की थकान के बाद यह थोड़ी राहत योग्य है लेकिन चिकित्सकों के अनुसार, खाने के तुरंत बाद बैठने या लेटने की आदत लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

खाने के बाद बैठने या लेटने के नुकसान:

पाचन में समस्या

खाने के बाद शरीर को हल्की-फुल्की हरकत की जरूरत होती है ताकि पाचन क्रिया सामान्य रूप से चल सके। सीधे बैठने या लेटने से खाना ठीक से पचने में देर होती है, जिससे गैस, अपच, सीने में जलन और पेट फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

वजन बढ़ना

खाने के बाद लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर को कैलोरी जलाने का मौका नहीं मिल पाता। खासकर भारी भोजन के बाद बैठने पर अतिरिक्त कैलोरी वसा के रूप में जमा होने लगती है, जिससे पेट और कमर के चारों ओर चर्बी बढ़ती है।

रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ना

डायबिटीज या प्रीडायबिटीज वाले लोगों के लिए यह आदत और भी हानिकारक है। खाने के तुरंत बाद बैठने से रक्त में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ जाता है क्योंकि शरीर उसे उपयोग नहीं कर पाता। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ता है।

आलस्य और थकान

खाने के बाद बैठे रहने पर अक्सर नींद आने लगती है। इसका कारण है कि रक्त संचार धीमा हो जाता है। इससे काम पर ध्यान कम होता है और शरीर भारी महसूस करता है।

क्या करना चाहिए?

हल्की सैर करें

खाने के 10 से 15 मिनट बाद धीरे-धीरे चलें। तेज़ नहीं बल्कि सामान्य गति में 5 से 10 मिनट की सैर ही पर्याप्त है। इससे पाचन बेहतर होता है और रक्त शर्करा नियंत्रित रहती है।

सीधा बैठें

यदि चलना संभव न हो तो कम से कम सीधे बैठें। झुककर या आधा लेटकर बैठने से बचें।

भारी काम टालें

खाने के तुरंत बाद व्यायाम या भारी काम न करें, इससे पाचन में समस्या हो सकती है।

सचेत रहें

यह छोटी सी आदत भले ही मामूली लगे, लेकिन लंबे समय में बड़े असर डाल सकती है इसलिए अपने दैनिक रूटीन में थोड़े बदलाव ही स्वास्थ्य का राज है।

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