सागरद्वीपः गंगासागर मेला 2026, भले ही कइयों के दिलों में यादें छो़ड़ गया लेकिन मछुआरों में खुशियां लौट आयी हैं। हालांकि खुशियों के साथ इनकी जीविका पर खतरे के बादल भी मंडरा रहे हैं। यह कहा जा सकता है कि जीविका लौट तो आयी लेकिन संघर्ष आगे और बड़ा है। गंगासागर अर्थात गंगा और सागर। पानी ही पानी यानी मछुआरों की जीविका। सागरद्वीप की आधी आबादी मछलियों के व्यवसाय पर निर्भर है। बंगाल का मुख्य भोज्य मछली-भात है। आसानी से बाजारों में मछलियां उपलब्ध हो जाती है लेकिन मछुआरों का जिंदगी में कितने गहरे संघर्ष हैं, यह शायद ही कोई जानता हो। सागरद्वीप के मछुआरों से हुई बातचीत में मछुआरों ने मूल तौर पर यही कहा कि सागर से गहरा उनकी दर्द भरा दास्तां है और संघर्ष लहरों की तरह है यानी संघर्षों का आना-जाना लगा हुआ है। सबसे पहले यह बता दे कि गंगासागर मेले के खत्म होते ही उनकी खुशियां क्यों व कैसे लौटी ? यह बताना जरूरी है। मेले की वजह से उनकी जीविका पर ब्रेक लग गया था। सरकारी फरमान के अनुसार 25 दिसम्बर से 15 जनवरी तक उन्हें सागर के तट पर न मछलियां नहीं पकड़ने की हिदायत दी गई थी और न ही मछियों को सागर तट पर सुखाने का निर्देश था। 15 जनवरी को मेला खत्म होते ही सागर तट पर मछलिया ही मछलियां दिखाई पड़ने लगी अर्थात मछुआरों का व्यवसाय शुरु हो गया। समुद्र तट मछलियों के साथ-साथ सबसे छोटी किस्म की झिंगा मछली(फूल चिंगड़ी) सुखाते हुए देखा गया। एक तरफ मछुआरे जाल फेंककर चिंगड़ी पकड़ रहे थे तो कुछ लोग सागर के किनारे जाल बिछाकर इसे सुखाते हुए नजर आए। कैसी है जिंदगी मछुआरों की, यह जानने की ईच्छा लेकर मछुआरों और मछली व्यवसायियों की संस्था सागर संगम बुड़ीर खाल संख्या लघु समिति के सचिव व सागर संगम मेरिन मत्स्यजीवि खूंटी समन्यवाय समिति के सदस्य अब्दार मल्लिक ने एई समय समाचार को बताया कि सागरद्वीप की आधी आबादी मछली व्यवसाय पर निर्भर है लेकिन सच तो यह है कि मछुआरों को चौतरफा लड़ाई लड़नी पड़ रही है। पहली लड़ाई राज्य सरकार से है, दूसरी लड़ाई सागर तट को कब्जा करने की कोशिश और तीसरी लड़ाई मछलियों के बड़े व्यवसायियों से हैं, जो बड़े-बड़े बिजली चालित बोट(ट्रॉली) लेकर आतो हैं और मोटे-मोटे जाल सागर में फेंकर रखते हैं। ऐसे में मछलियां और चिंगड़ी मोटे और बड़े वाले जाल में फंस जाती है जबकि छोटे व मझोले स्तर के मछुआरों की जाल में कम मछलियां फंसती हैं। बड़े-बड़े ट्रॉली तो भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के भी है। शुभेंदु अधिकारी का खुद बड़े व्यवसायियों से सांठ-गांठ है। अब्दार मल्लिक का कहना है कि बड़े व्यवसायियों का ऊंचे लोगों से बड़ा लेन देन है जिससे छोटे व मझोले व्यवसायियों पर खतरा मंडरा रहा है। दूसरी बड़ी समस्या है कि राज्य सरकार से उनकी कई मांगे है, जिसे पूरा करने के लिए सरकार से बातचीत चल रही है। तीसरी बड़ी समस्या है कि सागर तट को कब्जा कर बड़े-बड़े रिसॉर्ट बनाने की योजना चल रही है। इन तमाम समस्याओं और कुछ मांगों को लेकर 26 और 27 जनवरी को सागरद्वीप में एक रैली निकाली जायेगी और प्रखंड विकास अधिकारी(बीडीओ) को ज्ञापन सौंपा जायेगा। यदि शांतिपूर्ण तरीके से बात नहीं बनी तो आंदोलन की रास्ता अपनाया जायेगा। अब्दार मल्लिक का कहना है कि पूर्व मेदिनीपुर में मछलियों का सबसे बड़ा गढ़ है। यहां से मछलिया वहीं जाती है। यही नहीं बल्कि विदेशों में सागरद्वीप से मछलियां निर्यात की जाती है। अब्दार मल्लिक ने एक नयी खुशी की बात यह है कि यहां से अब मछलियों के निर्यात कई देशों में होने वाले हैं। कम से कम 10 देशों से बातचीत चल रही है। यदि बात बन गई तो उनका व्यवसाय और बढ़ जायेगा और आय भी बढ़ जायेगी लेकिन कुछ समस्याएं हैं और मांगे भी है, पूरी हुई तो मछुआरों की जिंदगी में खुशियों के सागर में लहरें ऊफान पर होगी।
गंगासागर मेला खत्म, मछुआरों में खुशियां लौटी पर जीविका पर मंडरा रहा है खतरा
मछुआरों की कुछ समस्याओं और कुछ मांगों को लेकर 26 और 27 जनवरी को सागरद्वीप में एक रैली निकाली जायेगी और प्रखंड विकास अधिकारी(बीडीओ) को ज्ञापन सौंपा जायेगा।
By लखन भारती
Jan 17, 2026 19:20 IST
गंगासागर मेला खत्म, शुरु हुआ मछली पकड़ने का धंधा।