नई दिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में खुलासा किया है कि फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी ने रेड फोर्ट इलाके में हुए कार बम धमाके से जुड़े तीन डॉक्टरों सहित कई विशेषज्ञों की नियुक्ति बिना किसी पुलिस सत्यापन या पृष्ठभूमि जांच के की थी। इन तीन में से दो डॉक्टरों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया है, जबकि तीसरा डॉक्टर नवंबर 2025 के रेड फोर्ट ब्लास्ट का कथित आत्मघाती हमलावर था।
ED ने यह जानकारी अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दाखिल चार्जशीट में दी है। इस करीब 260 पन्नों की चार्जशीट में सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को आरोपी बनाया गया है, जो विश्वविद्यालय और उससे जुड़े शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करता है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय ने छात्रों से फीस के रूप में अवैध धन अर्जित किया और संस्थानों की मान्यता व मान्यता संबंधी स्थिति को लेकर भ्रामक दावे किए।
ED ने बताया कि फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹140 करोड़ है। अदालत ने फिलहाल चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया है। चार्जशीट के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में कई डॉक्टरों को केवल कागजों में नियुक्त दिखाया गया। इन्हें '22 दिन पंच' या 'हफ्ते में दो दिन' जैसी शर्तों पर दर्शाकर नियमित फैकल्टी बताया गया ताकि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से आवश्यक मंजूरी हासिल की जा सके।
ED ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का बयान भी दर्ज किया है जिन्होंने स्वीकार किया कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की नियुक्ति के समय कोई पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। वहीं, विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने एजेंसी को बताया कि रेड फोर्ट ब्लास्ट से जुड़े डॉक्टर-डॉ. मुज़म्मिल गनई, डॉ. शाहीन सईद और डॉ. उमर नबी-उनके कार्यकाल में नियुक्त किए गए थे। इन नियुक्तियों की सिफारिश HR प्रमुख ने की थी और अंतिम मंजूरी चेयरमैन सिद्दीकी ने दी थी।
गौरतलब है कि 10 नवंबर 2025 को रेड फोर्ट इलाके में हुए कार बम धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, डॉ. उमर नबी विस्फोट से लदी कार चला रहा था और धमाके में मारा गया, जबकि बाकी दो डॉक्टर NIA की हिरासत में हैं।
ED का दावा है कि मेडिकल कॉलेज में कई डॉक्टर केवल निरीक्षण के समय मौजूद रहते थे। अस्पताल में न तो मरीज थे और न ही नियमित स्टाफ। एजेंसी को ऐसे चैट और रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि NMC निरीक्षण से पहले फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाया गया था।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि सिद्दीकी ने पूरे तंत्र पर नियंत्रण रखते हुए NMC को गुमराह किया और जून 2025 में हुई अंतिम जांच के दौरान भी कथित धोखाधड़ी जारी रखी, जिसके बाद MBBS सीटों की संख्या 150 से बढ़ाकर 200 कर दी गई। ED के अनुसार, इस मामले में अब तक ₹493.24 करोड़ की अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता चला है। जांच अभी जारी है और एजेंसी जल्द ही पूरक चार्जशीट दाखिल कर सकती है।