मुंबई: गौरी लंकेश की हत्या के आरोपी श्रीकांत पंगारकर ने मुंबई नगर निगम के वार्ड नंबर 13 से 2,621 वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। जीत के बाद वह जालना की सड़कों पर नाचते नजर आए और लोगों ने उन्हें घेरकर अबीर-गुलाल उड़ाए। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
श्रीकांत पंगारकर कोई आम राजनीतिक शख्सियत नहीं हैं। वह जर्नलिस्ट गौरी लंकेश की हत्या के मुख्य आरोपी हैं। इस केस की जांच अभी भी कोर्ट में चल रही है। पिछले साल सितंबर में उन्हें जमानत मिली थी, लेकिन केस अभी अनसुलझा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने हत्यारों को हथियार उपलब्ध कराए थे। इसके अलावा उनके खिलाफ एक्सप्लोसिव एक्ट, एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम एक्ट (UAPA) के तहत भी मामला दर्ज है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जालना में श्रीकांत की चुनावी जीत देश की हिंदुत्व राजनीति के मामले में नई दिशा दर्शाती है।
श्रीकांत 2024 में एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए थे और उन्हें जालना विधानसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई थी। वह नगर निगम का चुनाव भी लड़ना चाहते थे, लेकिन शिंदे कैंप ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। हालांकि, शिवसेना ने वार्ड नंबर 13 से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से श्रीकांत को समर्थन मिला।
मुंबई की 29 नगर निगमों के चुनाव परिणाम आने के दौरान दोपहर तक जालना के वार्ड नंबर 13 में श्रीकांत को विजेता घोषित किया गया। जीत के बाद उनका जश्न और डांस वायरल हो गया।
श्रीकांत पंगारकर पहले भी जालना नगर पालिका के पार्षद रह चुके हैं। 2001 से 2006 तक उन्होंने अविभाजित शिवसेना के सदस्य के रूप में सेवा की। 2011 के बाद उन्होंने शिवसेना से दूरी बना ली और हिंदू जनजागृति समिति जैसी कट्टर हिंदुत्व संगठनों से जुड़े।
गौरी लंकेश की हत्या 5 सितंबर 2017 को उनके घर के सामने हुई थी। पूरे देश में इसके बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहिष्णुता पर बहस शुरू हो गई। इस हत्या की जांच के लिए कर्नाटक पुलिस ने SIT का गठन किया और अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें श्रीकांत पंगारकर भी शामिल हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे मामलों में आरोपी की चुनावी जीत एक नया ट्रेंड सेट कर रही है। राजनीतिक और न्यायिक परिदृश्य में यह घटनाक्रम काफी चर्चा में है और भविष्य में चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।