'इस जिले (पश्चिम मिदनापुर) में भाजपा के कितने विधायक हैं? दो...दोनों ही तृणमूल में शामिल होना चाहते थे। ...नहीं लिया, सिर्फ आपकी मांगो का समर्थन करते हुए।' शुक्रवार की शाम को अपनी सभा से कुछ इसी अंदाज में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बड़ा धमाका किया। साथ ही उन्होंने कहा, "खड़गपुर (सदर) से अब तृणमूल को जीतवाना होगा।
खड़गपुर की सारी जिम्मेदारी मेरी। खड़गपुर की जनता को जहां जिस चीज की जरूरत होगी, मैं जिम्मेदारी लेकर उसे पूरा करूंगा।" उन्होंने कहा कि भाजपा को तो कितने मौके दिए। दो बार का विधायक बनाया, सांसद बनाया। बदले में कुछ मिला? बल्कि आपके अधिकार छिन ले रहे हैं।
नहीं दूंगा इनकी बातों का जवाब
अभिषेक बनर्जी के इस दावे के बाद ही खड़गपुर (सदर) के भाजपा विधायक हिरन्मय चट्टोपाध्याय और घाटाल के विधायक शीतल कपाट से संपर्क किया गया। हिरन्मय (हिरन) ने कहा, "महत्वहीन इस मामले में प्रतिक्रिया देकर मैं अपना समय और शक्ति (ऊर्जा) कोई भी खर्च नहीं करना चाहता हूं!"
वहीं शीतल ने कहा, "इनकी बातों का भी जवाब देना होगा? हम इन लोगों से और इनकी पार्टी से घृणा करते हैं।" इतना ही नहीं, शीतल कपाट ने दावा किया कि तृणमूल के कई विधायक भाजपा में शामिल होना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि अगर भाजपा अपने दरवाजे खोल देती तो तृणमूल के 100 विधायक भी रहते या नहीं...क्या पता। असल में चुनाव से पहले वह लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। भाजपा कर्मियों का मनोबल तोड़ना चाहते हैं। लेकिन यह समझ ले, साल 2026 में तृणमूल का विसर्जन निश्चित है।
कहां है मास्टर प्लान?
शीतल कपाट ने घाटाल मास्टर प्लान को लेकर भी अभिषेक बनर्जी पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि लोगों को गलत समझाने के लिए यहां-वहां सिर्फ थोड़ी जमीन खोद देने से ही क्या मास्टर प्लान बन गया? अभिषेक बनर्जी को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने घोषणा की थी कि 2024 के दिसंबर तक मास्टर प्लान बन जाएगा। कहां है मास्टर प्लान? अभी भी कह रहे हैं कि 3 से 4 सालों का समय लगेगा। उन्हें हाथ जोड़कर घाटाल के लोगों से माफी मांगनी चाहिए।
गौरतलब है कि खड़गपुर सदर कभी कांग्रेस के 'चाचा जी' ज्ञान सिंह सोहनपाल की सीट थी। 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के दिलीप घोष ने भारी अंतर से हराया था। बाद में 2019 के लोकसभा चुनाव में जब दिलीप मिदनापुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए तो शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने यहां उपचुनाव जीता। तृणमूल के प्रदीप सरकार ने भाजपा नेता प्रेमचंद झा को हराया था जिनकी हाल ही में मृत्यु हो गयी।
हालांकि सिर्फ डेढ़ साल के अंदर ही प्रदीप सरकार साल 2021 के विधानसभा में हिरन से सिर्फ 3,500 वोटों के अंतर से हार गए। इधर तब तक शुभेंदु अधिकारी भाजपा में शामिल हो चुके थे। फिलहाल खड़गपुर शहर को फिर से 'दिलीप घोष का गढ़' माना जा रहा है। वे वहां नियमित तौर पर कार्यक्रम कर रहे हैं। हिरन भी वहां उपस्थित रहते हैं। कुल मिलाकर 'मिनी इंडिया' के नाम से मशहूर 'रेल सिटी' खड़गपुर अब राजनीतिक रूप से जागरूक जिले के लोगों के लिए उत्साह का केंद्र बन गया है!