नयी दिल्लीः भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि कॉरपोरेट रणनीति का अहम स्तंभ बन चुका है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की ताजा AI Radar रिपोर्ट इस बदलाव की साफ तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 97 प्रतिशत भारतीय कंपनियां अगले एक साल में निवेश पर रिटर्न न मिलने की स्थिति में भी AI पर खर्च जारी रखेंगी, जो वैश्विक औसत 94 प्रतिशत से अधिक है। यह आंकड़ा भारतीय उद्योग की मानसिकता में आए बड़े परिवर्तन को दर्शाता है।
निवेश में अडिग भारत
AI पर निवेश को लेकर भारतीय कंपनियों का रुख बताता है कि वे इसे तात्कालिक मुनाफे के बजाय भविष्य की अनिवार्य जरूरत मान रही हैं। जैसे-जैसे वैश्विक कंपनियां 2026 तक AI पर खर्च दोगुना करने की तैयारी में हैं, भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले समय में AI पर खर्च कंपनियों के कुल राजस्व का लगभग 1.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
भरोसा मजबूत, लेकिन रणनीति अधूरी
रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह है कि 88 प्रतिशत भारतीय कारोबारी नेता AI से सकारात्मक व्यावसायिक परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, इसके उलट हकीकत यह है कि भारत में AI से जुड़े फैसले अब भी मुख्यतः टेक्नोलॉजी टीमों के हाथ में हैं। केवल 55 प्रतिशत CEOs ही AI रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 72 प्रतिशत है। यह अंतर बताता है कि भारत में AI को अभी भी पूरी तरह बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन टूल के रूप में नहीं अपनाया गया है।
स्किलिंग में कमजोरी: सबसे बड़ी चिंता
AI निवेश की सबसे कमजोर कड़ी वर्कफोर्स स्किलिंग है। भारत में सिर्फ 36 प्रतिशत कंपनियां कर्मचारियों को AI के अनुरूप प्रशिक्षित करने पर जोर दे रही हैं, जबकि वैश्विक औसत 44 प्रतिशत है।
अगर कर्मचारियों के कौशल को समान गति से विकसित नहीं किया गया, तो भारी निवेश के बावजूद AI से अपेक्षित परिणाम मिलना मुश्किल हो सकता है।
Agentic AI: नई उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगभग 90 प्रतिशत CEOs को विश्वास है कि Agentic AI 2026 तक ठोस व्यावसायिक नतीजे देगा। यही कारण है कि कंपनियां अपने AI बजट का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इस क्षेत्र में लगा रही हैं।
हालांकि, इसके साथ ही डेटा सुरक्षा, जवाबदेही और नैतिकता जैसे मुद्दे भी तेजी से उभर रहे हैं।
CEO की भूमिका और बढ़ती जवाबदेही
वैश्विक परिदृश्य में AI अब IT विभाग तक सीमित नहीं रहा। लगभग तीन-चौथाई CEOs खुद AI फैसलों की कमान संभाल रहे हैं और आधे CEOs मानते हैं कि AI को सफलतापूर्वक लागू करना उनकी नौकरी से जुड़ा है। यह बदलाव संकेत देता है कि AI आने वाले वर्षों में कॉरपोरेट नेतृत्व की परीक्षा बनेगा।
AI पर भारत का भरोसा निस्संदेह मजबूत है। लेकिन केवल निवेश से सफलता सुनिश्चित नहीं होगी। असली चुनौती यह है कि AI को नेतृत्व, कौशल और नीति के साथ कैसे जोड़ा जाए। यदि भारत इस संतुलन को साधने में सफल रहा, तो वह न सिर्फ तकनीकी, बल्कि आर्थिक रूप से भी वैश्विक AI मानचित्र पर मजबूत स्थान बना सकता है।