नई दिल्ली : मोबाइल, टीवी और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतें बढ़ सकती हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दो महीनों में स्मार्टफोन, टेलीविजन और लैपटॉप की कीमतों में 4 से 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे पहले 2025 के नवंबर–दिसंबर में इन इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतें अधिकतम 21 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। नई कीमत बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
उद्योग जगत का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के बढ़ते इस्तेमाल के कारण मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी वजह से चिप्स की उत्पादन लागत बढ़ रही है और इसका सीधा असर स्मार्टफोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है। स्मार्टफोन निर्माता अब अधिक कीमत पर मेमोरी चिप्स खरीदने को मजबूर हैं।
बाजार अनुसंधान संस्था काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक मेमोरी बाजार इस समय हाइपर-बुल चरण में पहुंच चुका है। पिछले तिमाही में मेमोरी चिप्स की कीमतें लगभग 50 प्रतिशत बढ़ीं। मौजूदा तिमाही में इसमें और 40–50 प्रतिशत तथा अप्रैल–जून के दौरान अतिरिक्त 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
काउंटरपॉइंट के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने बताया कि विवो और नथिंग जैसे कुछ ब्रांड्स ने जनवरी में 3 हजार से 5 हजार रुपये तक कीमतें बढ़ाई हैं। वहीं सैमसंग जैसी कंपनियां कैशबैक और डिस्काउंट कम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 2026 में भी मेमोरी की कीमतें बढ़ सकती हैं। जिसका असर नए मॉडलों पर पड़ेगा। कुछ मामलों में डिस्प्ले जैसे अन्य कंपोनेंट्स में भी कटौती की जा सकती है।
टीवी निर्माता भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। कोडक, थॉमसन और ब्लाउपॉइंट ब्रांड के टीवी बेचने वाली कंपनी सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स ने बताया कि उन्हें जरूरत का सिर्फ दसवां हिस्सा ही मेमोरी चिप्स मिल पा रहा है। कंपनी के सीईओ अवनीत सिंह मारवाह ने कहा कि नवंबर में हमने 7 प्रतिशत कीमत बढ़ाई थी। इस महीने 10 प्रतिशत बढ़ाई जा रही है और फरवरी में इसमें और 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। गणतंत्र दिवस सेल में भी डिस्काउंट बहुत कम रहेगा।
खुदरा विक्रेताओं के अनुसार लैपटॉप की कीमतें पहले ही 5–8 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं और बड़े टीवी ब्रांड भी जल्द कीमतें बढ़ा सकते हैं। ग्रेट ईस्टर्न रिटेल के डायरेक्टर पुलकित बैद ने कहा कि इस मूल्यवृद्धि का मांग पर तुरंत असर पड़ेगा।
ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक नवंबर–दिसंबर में स्मार्टफोन की कीमतें 3 से 21 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। संगठन के चेयरमैन कैलाश लाखियानी ने कहा कि कीमतों के इस झटके से बाजार में बिक्री घट सकती है। 2026 में मोबाइल शिपमेंट 10–12 प्रतिशत तक कम हो सकता है। सबसे ज्यादा दबाव 20 हजार रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट पर पड़ेगा। ग्राहक फिलहाल इंतज़ार करने का रुख अपना रहे हैं।
काउंटरपॉइंट ने यह भी बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से कंपनियों पर दोहरा दबाव बन रहा है। इसके चलते 2026 में स्मार्टफोन की बिक्री अनुमान से भी ज्यादा गिर सकती है।