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दूध का स्वाद मट्ठे में ही मिला, नोबेल हाथ में लेकर माचादो की तारीफ में गदगद ट्रंप बोले- ‘असाधारण महिला…’

नोबेल पुरस्कार जीतने की कोशिश डोनाल्ड ट्रंप ने कम नहीं की थी। लेकिन अंततः जीत न पाने पर भी उन्हें पदक मिल ही गया। दूध का स्वाद मट्ठे में ही पूरा हो गया।

By कौशिक भट्टाचार्य, Posted by डॉ.अभिज्ञात

Jan 16, 2026 12:13 IST

वाशिंगटनः नोबेल पुरस्कार जीतने की कोशिश उन्होंने कम नहीं की थी। लेकिन अंततः जीत न पाने के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक पदक मिल गया। वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचादो ने अपना नोबेल पदक ट्रंप के हाथों सौंप दिया। दूध का स्वाद मट्ठे में ही पूरा हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति भावुक हो उठे। माचादो की खुलकर प्रशंसा करते हुए उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “असाधारण महिला। बहुत कुछ सहन कर आज इस मुकाम तक पहुँची हैं।” उधर माचादो ने भी ट्रंप की जमकर तारीफ की।

3 जनवरी को वेनेज़ुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी सेना उठा ले गई। इसके बाद ही ट्रंप ने घोषणा कर दी कि अब से वेनेज़ुएला की ज़िम्मेदारी वही संभालेंगे। यहाँ तक कि खुद को ‘एक्टिंग प्रेसिडेंट’ बताते हुए यह भी जताने की कोशिश की कि उनकी अनुमति के बिना कुछ भी नहीं होगा।

मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद समेत कई आरोपों में मादुरो को न्यूयॉर्क की फेडरल अदालत में पेश किया गया है। दूसरी ओर वेनेज़ुएला की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में डेलसी रोड्रिगेज़ ने शपथ ले ली है। जबकि मादुरो को सत्ता से हटाने के लिए सबसे ज़्यादा संघर्ष विपक्षी नेता माचादो ने ही किया था। आंदोलन, विरोध-प्रदर्शन कुछ भी नहीं छोड़ा। ट्रंप से मदद भी माँगी थी।

लेकिन डेलसी के राष्ट्रपति बनते ही माचादो हाशिए पर चली गईं। ट्रंप ने भी साफ कह दिया, “देश के भीतर माचादो को जनसमर्थन हासिल नहीं है।” वेनेज़ुएला की राजनीति से वे धीरे-धीरे गायब होती चली गईं। उसी समय से नोबेल विजेता माचादो राजनीति के केंद्र में लौटने की कोशिश में जुटी थीं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग का मानना है कि आज अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल पदक सौंपना, दरअसल ट्रंप को अपने पक्ष में करने की एक रणनीति है।

शुक्रवार को व्हाइट हाउस में माचादो ने ट्रंप के साथ लंबी बैठक की। वहीं उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार का पदक अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथों सौंप दिया। ट्रंप ने भी वह पदक स्वीकार कर लिया। बैठक के बाद माचादो की जमकर तारीफ करते हुए ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मैंने जो काम किया है, उसकी मान्यता के रूप में माचादो ने मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार का पदक दिया है। यह एक अनोखा सम्मान है। माचादो असाधारण महिला हैं। बहुत कष्ट सहकर वह आज इस स्थान तक पहुँची हैं।”

हालाँकि बैठक में माचादो के साथ क्या चर्चा हुई, इस बारे में ट्रंप ने कुछ नहीं बताया। माचादो ने भी चुप्पी साधे रखी। उन्होंने केवल इतना कहा, “मैंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार का पदक उपहार स्वरूप राष्ट्रपति को सौंपा है। यह वेनेज़ुएला के लोगों की स्वतंत्रता के लिए उनके काम की मान्यता है।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “हम अमेरिका के राष्ट्रपति पर भरोसा कर सकते हैं। धन्यवाद, ट्रंप।”

इससे पहले भी ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि नोबेल शांति पुरस्कार उन्हीं को मिलना चाहिए। ट्रंप के शब्दों में, “मैंने अकेले 8 युद्ध रुकवाए हैं। अगर मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया जाएगा तो फिर किसे दिया जाएगा?” आखिरकार उन्हें नोबेल तो मिला लेकिन इस तरह नोबेल पुरस्कार का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता, यह स्पष्ट करते हुए नोबेल संस्थान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

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