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ईरान में पहले प्रदर्शनकारी एरफान सोल्तानी को फांसी की तैयारी? रोकने के लिए वैश्विक दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि फांसी दी गई तो वह “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेंगे।

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 15, 2026 18:28 IST

तेहरान (ईरान): ईरान में अशांति जारी है और बुधवार को विरोध-प्रदर्शनों ने 20वां दिन पूरा कर लिया। शुरुआत रिकॉर्ड महंगाई और ईरानी मुद्रा के तेज़ पतन के खिलाफ प्रदर्शनों से हुई थी, जो अब देशव्यापी आंदोलन में बदल गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार 280 से अधिक स्थानों पर आंदोलन और प्रदर्शन की खबरें हैं। ईरान में गहराता राजनीतिक संकट इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और गंभीर हो गया है। देश में जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले में 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी एरफान सोल्तानी को फांसी देने की तैयारी के बीच वैश्विक हस्तक्षेप की चेतावनियाँ सामने आई हैं और अमेरिका के साथ तनाव भी बढ़ गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यह ताज़ा घटनाक्रम 15 जनवरी का है।

एरफान सोल्तानी तेहरान के पास स्थित फर्दीस शहर का एक दुकानदार है। उसे इस महीने की शुरुआत में देशभर में फैले प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था। ये प्रदर्शन आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक असंतोष के कारण भड़के थे। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सोल्तानी को प्रदर्शनों से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई। आलोचकों के अनुसार यह प्रक्रिया बेहद तेज़ी से पूरी की गई और सोल्तानी को कानूनी सलाह तक का अवसर नहीं दिया गया।

इससे पहले देश के मुख्य न्यायाधीश घोलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई ने कथित “उपद्रवियों” के खिलाफ त्वरित सुनवाई और फांसी की मांग की थी। अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के लिए “उपद्रवी” शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। तसनीम समाचार एजेंसी के अनुसार उन्होंने कहा, “जिन तत्वों ने सड़कों पर लोगों का सिर काटा या लोगों को ज़िंदा जलाया, उन्हें जल्द से जल्द मुकदमे में लाकर सजा दी जानी चाहिए। अगर हम जल्दी नहीं करेंगे तो इसका वही असर नहीं होगा।”

परिवार के एक सदस्य के अनुसार स्थानीय अधिकारियों ने सोल्तानी के परिजनों को फांसी से केवल कुछ मिनट पहले ही सूचना दी, जबकि उन्हें कुछ दिन पहले ही हिरासत में लिया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन बताया है।

सीबीएस के अनुसार अंतरराष्ट्रीय चिंता उस समय और बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को कड़ी चेतावनी दी। वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि फांसी दी गई तो वह “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेंगे। उन्होंने अमेरिकी नीति को सीधे सोल्तानी के मामले और व्यापक दमन से जोड़ दिया। बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक बयानों में संकेत दिया कि “ईरान में हत्याएँ रुक रही हैं” और संभव है कि “फांसी देने की कोई योजना न हो”। हालांकि उन्होंने अपने स्रोतों का खुलासा नहीं किया।

इन बयानों के बावजूद ईरान की न्यायपालिका ने संकेत दिया है कि वह प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ तेज़ सुनवाई और सख्त सज़ा की नीति जारी रखेगी। न्यायपालिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार को उन तत्वों के खिलाफ “तेज़ी से” कार्रवाई करनी होगी, जिन्हें वह राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा और आतंकवादी करार देती है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस दावे को राजनीतिक दमन का बहाना बताया है।

इस स्थिति का असर क्षेत्रीय और वैश्विक संबंधों पर भी पड़ा है। जी7 के सदस्य देशों सहित कई पश्चिमी देशों ने संभावित फांसियों की निंदा की है और संयम बरतने की अपील की है। यूरोपीय सरकारों ने बढ़ती अस्थिरता के डर से ईरान जाने वाले अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह भी जारी की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की “कोई योजना नहीं” है, जबकि देश के भीतर से आ रही रिपोर्टें इससे अलग तस्वीर पेश कर रही हैं।

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