तेहरानः सिर्फ 26 साल का था इरफान सोलतानी। पिछले हफ्ते वह तेहरान की सड़कों पर चल रहे प्रोटेस्ट मार्च में शामिल हुआ था। बुधवार की सुबह स्थानीय समयानुसार, उसके गले में फांसी का फंदा डाल दिया गया। इरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन को हटाने की मांग को लेकर चल रहे प्रोटेस्ट में यह पहली मौत की सजा मानी जा रही है।
इरफान की गिरफ्तारी के ठीक एक हफ्ते बाद यह फांसी हुई, वह भी बिना किसी ट्रायल के। पूरी दुनिया में इस खबर ने तहलका मचा दिया है।
गिरफ्तारी, गायब होना और मौत की सजा
8 जनवरी को इरफान को करज शहर के फ़ार्डिस इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद तीन दिन तक परिवार को कोई खबर नहीं मिली।
11 जनवरी को खामेनेई की सिक्योरिटी फोर्स ने अचानक परिवार को फोन कर बताया कि इरफान उनकी कस्टडी में है और उसे मौत की सजा सुनाई गई है। परिवार को यह समझने का मौका भी नहीं मिला कि सजा कब लागू होगी। सिर्फ छह दिन में यह फैसला लागू हो गया।
वकीलों का कहना है कि गिरफ्तारी के दो-तीन दिन के अंदर मौत की सजा देना कानूनी तौर पर नामुमकिन है। ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने इसे इंसाफ के नाम पर एक मजाक बताया है।
इरफान सोलतानी कौन है?
इरफान किसी बदनाम अपराधी या राजनीतिक पार्टी से जुड़ा नहीं था। वह गारमेंट इंडस्ट्री में काम करता था और फैशन तथा बॉडीबिल्डिंग में रुचि रखता था। इंस्टाग्राम पर उसकी आम जिंदगी की तस्वीरें यही दिखाती हैं।
हालांकि, उसने नाइंसाफी का विरोध करने में कोई झिझक नहीं दिखाई। गिरफ्तारी से पहले उसे धमकियां मिली थीं, लेकिन वह सड़कों पर अपने प्रदर्शन से पीछे नहीं हटे। इसी ‘क्राइम’ के कारण आज उसकी जान समय से पहले चली गई।
ईरानी सरकार का इल्जाम
खामेनेई सरकार ने इरफान पर ‘मोहरेब’ का आरोप लगाया, जिसका अर्थ है ‘अल्लाह से दुश्मनी’। ईरानी कानून में यह सबसे गंभीर अपराधों में से एक है। मौजूदा सत्ताधारी समूह से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस कानून का इस्तेमाल आमतौर पर नाराज लोगों और प्रदर्शनकारियों को डराने और चुप कराने के लिए किया जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि बिना किसी ट्रायल, सुनवाई या वकील के यह फैसला कैसे सुनाया गया। ‘ईरान वायर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार को साफ-साफ बताया गया कि इस सजा को रिव्यू करने का कोई मौका नहीं है। विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार किए गए लोगों को मौत की सजा दी जाएगी। यह फैसला अंतिम है।
10 मिनट की ‘आखिरी मुलाकात’
इरफान के परिवार का कहना है कि खामेनेई प्रशासन ने धमकी दी कि अगर वे मीडिया से बात करेंगे, तो बाकी परिवार के सदस्य भी गिरफ्तार हो सकते हैं। बहुत मिन्नतों के बाद भी उन्हें इरफान से सिर्फ 10 मिनट के लिए मिलने दिया गया। यह उनकी आखिरी मुलाकात और अंतिम विदाई थी।
ट्रायल है या ‘फील्ड एक्जीक्यूशन’?
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट इसे ‘फील्ड एक्जीक्यूशन’ या एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग कह रहे हैं। ह्यूमन राइट्स लॉयर मोहम्मद ओलाइफार्ड ने कहा कि ईरानी कानून के तहत भी किसी को अरेस्ट करके दो-तीन दिन में फांसी देना नामुमकिन है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम 10 दिन लगते हैं।
‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ और अन्य अंतरराष्ट्रीय ह्यूमन राइट्स संगठन भी चिंतित हैं और कहते हैं कि इतनी जल्दी फांसी देना प्रदर्शनकारियों में डर पैदा करने की रणनीति है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि फांसी दी गई तो वॉशिंगटन सबसे कड़ी कार्रवाई करेगा। बावजूद इसके फांसी देने का सिलसिला जारी रहा। इरान में इरफान जैसे कई युवा चुपचाप गायब हो रहे हैं, लेकिन सही संख्या शायद कभी सामने न आए, क्योंकि देश में इंटरनेट बंद है और बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया है।