लखनऊ : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में करीब पांच साल पहले आग लगने की एक घटना को अब हत्या का मामला माना गया है। डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने इस केस में हत्या की धाराएं लगाई हैं।
पुलिस के अनुसार दिसंबर 2020 में आग लगने की घटना में मिले जले हुए अवशेषों को पहले जानवर का शव मानकर नजरअंदाज कर दिया गया था। लेकिन वैज्ञानिक जांच में यह साफ हो गया कि ये अवशेष एक 18 साल के युवक के थे। इसके बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है।
ये जले हुए अवशेष 20 दिसंबर 2020 की सुबह रोजा इलाके की एक दुकान से मिले थे। जहां एक रात पहले आग लगी थी। उस समय पुलिस ने इन्हें जानवर का शव समझकर बोरे में भरकर फेंक दिया था। बाद में एक पशु चिकित्सक ने जांच कर बताया कि ये अवशेष इंसान के हैं। जिसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया।
मौके से पुलिस को एक लोहे का कड़ा और बेल्ट के कुछ टुकड़े भी मिले थे। बाद में इन सामानों की पहचान अभिषेक (18) के परिवार ने की। अभिषेक उसी रात से लापता था।
पुलिस ने बताया कि शुरुआत में परिवार को लगा कि अभिषेक दोस्तों या रिश्तेदारों के यहां गया होगा और लौट आएगा। लेकिन कई दिनों तक जब उसका कोई पता नहीं चला, तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की और बाद में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर 21 फरवरी 2021 को रामचंद्र मिशन थाने में मामला दर्ज किया गया।
शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने बताया कि अभिषेक यादव के माता-पिता के डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। कई बार याद दिलाने के बाद मंगलवार को रिपोर्ट मिली, जिसमें पुष्टि हुई कि जला हुआ शव उनके बेटे का ही था।
अभिषेक की मां की शिकायत के मुताबिक 19 दिसंबर 2020 को अभिषेक खाना खाने के लिए एक होटल गया था।वहां उसका नसीम, राजू और एक पिकअप वाहन चालक से झगड़ा हुआ था। आरोप है कि इसके बाद तीनों ने अभिषेक को दुकान में बंद कर आग लगा दी। जिससे उसकी मौत हो गई।
डीएनए रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी की कोशिश में लगी है।