लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने यूपी गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में उनकी अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदल दिया है। मंगलवार को यह फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि पहले दी गई अंतरिम राहत को अब पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है।
अब्बास अंसारी को मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद सितंबर में अदालत ने उनकी जमानत की शर्तों में आंशिक ढील भी दी थी। अदालत ने अनुमति दी थी कि अब्बास अंसारी लखनऊ स्थित अपने मूल पते के अलावा किसी अन्य पते पर रह सकते हैं, बशर्ते वह नया पता उत्तर प्रदेश पुलिस और ट्रायल कोर्ट को सूचित करें।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले यह भी साफ किया था कि विधायक होने के नाते अब्बास अंसारी के सार्वजनिक बोलने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने कहा था कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर वह सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर अपनी राय रख सकते हैं, जैसा कि आमतौर पर राजनेता करते हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त भी जोड़ी थी कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों पर सार्वजनिक मंच से कोई टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि ये मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अंतरिम जमानत को स्थायी बनाते हुए यह संकेत दिया कि आरोपी द्वारा अब तक जमानत की शर्तों का पालन किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दिसंबर 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अब्बास अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
अब्बास अंसारी के खिलाफ अगस्त 2024 में यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन पर मारपीट और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तरों पर चर्चा का विषय बना रहा है।