नई दिल्ली: अब क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा ग्राहकों को 10 मिनट में डिलीवरी का वादा करने का दौर खत्म होने वाला है। सरकार ने यह कदम डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा और जीवन की रक्षा को देखते हुए उठाया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इस कदम को समयोचित, संवेदनशील और दूरदर्शी करार दिया।
क्यों आया यह फैसला?
क्विक कॉमर्स कंपनियां जैसे Blinkit, Zepto, Zomato और Swiggy ने तेजी से अपने ग्राहकों तक सामान पहुंचाने का दबाव बनाने के लिए असुरक्षित समय सीमा तय कर रखी थी। इसका सीधा असर डिलीवरी कर्मचारियों पर पड़ता था, जिन्हें जान जोखिम में डालकर पैकेज पहुंचाना पड़ता था।
CAIT के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल पहले ही इस पर चिंता जता चुके थे। 2024 में उन्होंने संसद में डार्क स्टोर्स और क्विक कॉमर्स मॉडल के खतरों की तरफ ध्यान खींचा था। उनके अनुसार, यह मॉडल न सिर्फ स्थानीय व्यापारियों के लिए नुकसानदेह है बल्कि शहरों की योजना और कर्मचारियों की सुरक्षा को भी प्रभावित करता है।
क्या हुआ अब तक?
22 अप्रैल 2025: CAIT ने क्विक कॉमर्स की “डार्क रियलिटी” प्रेस कॉन्फ्रेंस में उजागर की।
26 अक्टूबर 2025: विस्तृत पत्र के माध्यम से कंपनियों के कानून उल्लंघन, लेबर नियमों की अनदेखी और कर्मचारियों के शोषण की जानकारी केंद्र सरकार को दी गई।
अब, केंद्रीय सरकार ने 10 मिनट डिलीवरी वादे को रोकने का निर्णय लिया।
कंपनी Blinkit ने अपने टैगलाइन को बदल दिया है। पहले “10,000+ उत्पाद 10 मिनट में” था, अब बदलकर “30,000+ उत्पाद सीधे आपके घर” कर दिया गया। Zepto, Zomato और Swiggy भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
क्या है असर?
कर्मचारियों की सुरक्षा: 10 मिनट की समयसीमा हटने से डिलीवरी कर्मचारियों पर तनाव और जोखिम कम होगा।
उपभोक्ताओं की अपेक्षाएं: ग्राहकों को तुरंत सामान नहीं मिलेगा, लेकिन यह लंबी अवधि में सेवा की गुणवत्ता और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
व्यापार मॉडल में बदलाव: कंपनियों को अब सस्टेनेबल और सुरक्षित वितरण मॉडल अपनाना पड़ेगा।
स्थानीय व्यापारियों को फायदा: डार्क स्टोर मॉडल पर अंकुश लगने से छोटे व्यापारी और स्थानीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म प्रतिस्पर्धा में बने रहेंगे।
इस फैसले से क्विक कॉमर्स कंपनियों के तत्काल लाभ की दौड़ पर ब्रेक लगा है। CAIT का कहना है कि केवल नियम बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरा सिस्टम बदलना जरूरी है। इसका मतलब यह कि केवल 10 मिनट डिलीवरी को हटाना पर्याप्त नहीं, बल्कि डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा, श्रम कानूनों का पालन और स्थानीय व्यापार संरक्षण के लिए ठोस सुधार जरूरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम गिग वर्कर्स और छोटे व्यवसायों के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है। लेकिन कंपनियों को अब समान्य डिलीवरी समय, बेहतर कार्य प्रबंधन और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान देना होगा।
केंद्र सरकार का यह कदम सिर्फ एक नियम नहीं बल्कि संदेश है कि कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोपरि माना जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या क्विक कॉमर्स कंपनियाँ सुरक्षित और स्थायी मॉडल अपनाने के लिए तैयार हैं या केवल मार्केटिंग बदलाव करेंगी।