नई दिल्ली : भारत के केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया ‘पंचायत विकास सूचकांक’ या ‘पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स’ (पीएआई) ने जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। ‘पीएआई’ की असली ताकत उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। महाराष्ट्र या गुजरात जैसे राज्यों में जब कोई पंचायत ‘महिला-अनुकूल’ या ‘पर्यावरण-अनुकूल’ श्रेणी में पिछड़ जाती है तब ‘पीएआई’ के स्कोर को देखकर प्रशासन तेजी से सीसीटीवी लगाने या जलनिकासी व्यवस्था विकसित करने जैसे कदम उठाता है। दरअसल अपनी ताकत और कमजोरियों की स्पष्ट समझ मिलने से पंचायतें अब कहीं अधिक लक्ष्य केन्द्रित कार्य कर पा रही हैं।
सतत विकास के 17 लक्ष्यों में से 9 विषयों का स्थानीय स्तर पर 435 घटकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। pai.gov.in पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों को ग्रामसभा में सत्यापित करने के बाद 0 से 100 के स्कोर के आधार पर पंचायतों की ग्रेडिंग की जाती है। 2022-23 वित्तीय वर्ष के सर्वेक्षण में पाया गया कि 61.2 प्रतिशत पंचायतें ‘एस्पिरेंट’ (स्कोर 40-59.99) स्तर पर हैं और 90 से अधिक स्कोर कर ‘अचीवर’ बनने में कोई भी सफल नहीं हो सका। इस सूची में गुजरात और तेलंगाना शीर्ष पर हैं।
सिक्किम, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य अब ‘पीएआई’ स्कोर को महत्व देकर वित्तीय अनुदान और प्रशिक्षण की व्यवस्था कर रहे हैं। पंजाब, झारखंड, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में राज्य-स्तरीय विभिन्न कार्यक्रमों में ‘पीएआई’ के मूल्यांकन में अच्छा प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को पुरस्कृत भी किया जाता है। अनुभव के आधार पर सूचकांकों की संख्या 435 से घटाकर 119 कर ‘पीएआई 2.0’ लाया गया है जिससे यह प्रणाली और अधिक सरल हो जाएगी। पहले चरण में जहां 2 लाख 16 हजार पंचायतों ने भाग लिया था वहीं दूसरे चरण में यह संख्या बढ़कर 2 लाख 60 हजार हो गई है।
हालांकि तकनीकी कौशल या आंकड़ों की गुणवत्ता की कमी जैसी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं फिर भी मंत्रालय अब कौशल विकास कार्यक्रमों पर विशेष जोर दे रहा है। 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में ‘पीएआई’ एक युगांतकारी उपकरण है। इसने न केवल पारदर्शिता लाई है बल्कि पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल भी बनाया है जो विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार है।
सुशील कुमार लोहानी
(लेखक: केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हैं)