नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के नामांकन व प्लेसमेंट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और योजना के तहत धन वितरण की गहन जांच की मांग की। सीएजी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता कन्नन गोपीनाथन ने आरोप लगाया कि पीएमकेवीवाई में “व्यापक भ्रष्टाचार” है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “इस मामले में पूरी तरह से जांच होनी चाहिए। इसलिए हम चाहते हैं कि सरकार एक जांच आयोग गठित करे और सच्चाई सामने लाए। यह न केवल देश के करदाताओं के , बल्कि युवाओं के साथ भी साथ विश्वासघात है।”
गोपीनाथन ने दावा किया कि 2015 से 2022 की अवधि के प्रदर्शन पर आई हालिया सीएजी रिपोर्ट ने पीएमकेवीवाई में घोटाले को उजागर किया है। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन को मोदी सरकार ने नया रूप देकर पीएमकेवीवाई नाम दिया और सात वर्षों में इस योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये वितरित किए। उनका दावा है कि सीएजी रिपोर्ट में यह सामने आया है कि 94.53 प्रतिशत लाभार्थियों के बैंक खाते फर्जी पाए गए, 96 प्रतिशत के मोबाइल नंबर फर्जी थे और 97 प्रतिशत मामलों में मूल्यांकनकर्ताओं (असेसर) का विवरण धोखाधड़ीपूर्ण था।
उन्होंने यह भी कहा कि योजना के तहत 61 लाख प्रशिक्षकों से संबंधित जानकारी अधूरी थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले एक करोड़ लोगों के ईमेल और मोबाइल नंबर एक जैसे पाए गए। केरल की एक कंपनी में ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि लोगों को वास्तव में कोई प्लेसमेंट मिला ही नहीं।
कांग्रेस नेता के अनुसार, सीएजी ऑडिट में पीएमकेवीवाई 2.0 और पीएमकेवीवाई 3.0 जिसमें अल्पकालिक प्रशिक्षण, पूर्व शिक्षण की मान्यता और विशेष परियोजनाएं शामिल हैं, की जांच की गई और इसमें व्यापक डेटा हेरफेर, वित्तीय कुप्रबंधन, कमजोर निगरानी तथा बुनियादी पात्रता मानकों के उल्लंघन का खुलासा हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि कक्षा 9 से अधिक शिक्षा की आवश्यकता वाले पदों के लिए 60,68,523 उम्मीदवारों के विश्लेषण में 6,77,807 उम्मीदवारों (11.17 प्रतिशत) की शैक्षणिक जानकारी गायब थी।
विश्लेषण में यह भी सामने आया कि 8,09,046 उम्मीदवार (13.33 प्रतिशत) न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को पूरा नहीं करते थे। इसके अलावा, पूर्व तकनीकी शिक्षा की आवश्यकता वाले पदों के लिए प्रमाणित 1,23,533 उम्मीदवारों में से 1,05,493 (85.40 प्रतिशत) के पास केवल बुनियादी साक्षरता या सामान्य शिक्षा ही थी।