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कोलकाता में बिताए अपने पुराने दिनों को याद कर शशि थरूर ने कहा - मैंने यहां अच्छा और बुरा सब देखा है!

डॉ. शशि थरूर ने 'City of Joy' कोलकाता के प्रति अपने गहरे लगाव के साथ-साथ समय के साथ महानगर में आए बदलावों के बारे में पर खुलकर बात की।

By Shubham Ganguly, Shrey Banerjee, Posted By : Moumita Bhattacharya

Jan 12, 2026 19:26 IST

डॉ. शशि थरूर सिर्फ एक उत्कृष्ट राजनेता ही नहीं हैं बल्कि उनके व्यक्तित्व के कई और पहलू भी हैं। वह एक बेस्टसेलर लेखक भी हैं जिनका मुरीद पूरी दुनिया है, वह संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनयिक भी रह चुके हैं और पिछले लंबे समय से केरल से सांसद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। डॉ. थरूर अंग्रेजी भाषा पर अपनी शानदार पकड़ के साथ ही विभिन्न मुद्दों पर अपने बेबाक टिप्पणियों की वजह से हमेशा ख़बरों की सुर्खियों में छाए रहते हैं।

एक होनहार छात्र और लाजवाब वक्ता, डॉ. शशि थरूर का कोलकाता से एक खास रिश्ता है। शशि थरूर ने कोलकाता से ही अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की। एपीजे कोलकाता लिटररी फेस्टिवल (Apeejay Kolkata Literary Festival) के समापन समारोह में विशेष अतिथि के तौर पर पहुंचे डॉ. शशि थरूर ने 'City of Joy' कोलकाता के प्रति अपने गहरे लगाव के साथ-साथ समय के साथ महानगर में आए बदलाव और वह कैसे इस शहर को देखते हैं? इन सभी मुद्दों पर खुलकर बात की।

लाजवाब है इस महानगर की आत्मा

कोलकाता डॉ. शशि थरूर के व्यक्तिगत जीवन का एक मुख्य हिस्सा रहा है। उन्होंने कोलकाता में बतौर हाई स्कूल छात्र काफी समय बिताया था और अब वह गौर कर रहे हैं कि इस शहर में काफी बदलाव भी आ चुके हैं।

थरूर कहते हैं, "इस शहर की आत्मा लाजवाब है। मैं यहां अलग-अलग समय पर रहा हूं और मैंने यहां अच्छा और बुरा दोनों देखा है। मैं यहां 60 व 70 के दशक के शुरुआत में रहा हूं जब कोलकाता की सड़कों पर हिंसा फैली रहती थी। जब जादवपुर यूनिवर्सिटी के उपाचार्य की चाकू से गोदकर उनके परिसर में ही हत्या कर दी गयी थी, गुंडे और बदमाश परीक्षाओं तक में बाधा डालते थे। मैंने यह सब कुछ यहां देखा है।"

उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में पढ़ने की कोशिश के दौरान हिंसा का उन पर कितना असर हुआ था। उन्होंने कहा, "इसी वजह से मुझे दिल्ली में सेंट स्टिफेंस कॉलेज जाना पड़ा क्योंकि सभी कह रहे थे कि तुम यहां कोलकाता में पढ़ाई कर ही नहीं सकोगे। तुम्हें यहीं नहीं पता कि परीक्षाएं कब होंगी, होंगी भी अथवा नहीं, रिजल्ट कब आएगा या रिजल्ट जैसी कोई चीज घोषित भी होगी? यहां इतना ज्यादा शोरगुल मचा हुआ था।"

बदल रहा है कोलकाता का परिवेश

डॉ. शशि थरूर ने कोलकाता में हो रहे सकारात्मक बदलावों के बारे में भी बात की। "मैंने यहां बहुत खराब माहौल भी देखा है तो मैंने यहां अच्छा समय भी देखा है, समृद्धि भी देखी है। मैंने यहां की संस्कृति को महसूस किया है, बादल सरकार और उत्पल दत्त का कोलकाता भी देखा है।"

कोलकाता के फिर से नए बनने और पुरानी चीजों के बिल्कुल उसी तरह से बने रहने के बारे में बोलते हुए थरूर ने कहा, "अब आज फिर से एक तरह का नया फलता-फूलता कोलकाता है जो ऊर्जावान है, खुशहाल है और एयरपोर्ट के रास्ते में पूरा नया शहर बन गया है। यह मेरे छात्र जीवन के दिनों में नहीं था। इसलिए मुझे कोलकाता आना बहुत पसंद है और इन चीजों के बारे में जानना भी। लेकिन हां, इन सबसे ऊपर यह संस्कृति, भोजन और यहां म्यूजिक के बारे में है। सब कुछ - रवींद्र संगीत से लेकर कॉलेज स्ट्रीट में किताबों की दुकानें - ये कोलकाता का वह पहलू है जो कभी नहीं बदला।"

शशि थरूर का मानना है कि साल-दर-साल कोलकाता में भले ही बदलाव आ जाए लेकिन इस शहर का दिल हमेशा एक जैसा ही बना रहेगा। इसके दर्दनाक इतिहास और आधुनिक बदलावों के बावजूद महानगर की संस्कृति, रचनात्मकता और अपनापन इसे खास बनाती है। इसकी वजह से ही कोलकाता एक ऐसी जगह बन गयी है जहां वह प्यार और पुरानी यादों को ताजा करने के लिए वापस लौटते हैं।

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