कोलकाताः कोलकाता के लॉउडन स्ट्रीट और सॉल्टलेक में चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापेमारी के दौरान पिछले गुरुवार को जिन रुकावटों का सामना करना पड़ा, उसे लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। लेकिन यह शिकायत कोलकाता के किसी थाने में नहीं, बल्कि दिल्ली के थाने में दर्ज की जा सकती है। इस मामले में ED पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है और सोमवार को इस पर सुनवाई होने की संभावना है। ED से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान दिल्ली थाने में शिकायत का मुद्दा भी उठ सकता है।
लॉउडन स्ट्रीट, शेक्सपियर सरणी थाना क्षेत्र में आता है, जबकि I-PAC का दफ्तर विधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स थाने के अंतर्गत है। इन दोनों थानों में ED के खिलाफ घटना के पहले दो दिनों में ही तीन मामले दर्ज किए जा चुके हैं। कोलकाता पुलिस के साथ-साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी खुद कोलकाता और विधाननगर के थानों में शिकायत दर्ज कराई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस घटना ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया और जिसके चलते ED कोलकाता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, उसमें चार दिन बीत जाने के बाद भी ED ने स्थानीय थाने में शिकायत क्यों नहीं की।
आमतौर पर किसी केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई में अगर कोई बाधा डाली जाती है या छापेमारी के दौरान अहम दस्तावेज ले जाए जाते हैं, तो स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई जाती है। हालांकि ED के एक अधिकारी का कहना है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि शिकायत सिर्फ स्थानीय थाने में ही करनी पड़े। उनके मुताबिक, ED जैसी केंद्रीय एजेंसी देश में कहीं भी शिकायत दर्ज करा सकती है।
ED का कहना है कि जिस कोयला तस्करी मामले में यह छापेमारी की गई थी, उसकी ECIR (एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) 28 नवंबर 2020 को दिल्ली स्थित ED कार्यालय में दर्ज हुई थी। गुरुवार को कोलकाता में हुई छापेमारी के लिए बुधवार को ही दिल्ली से चार अधिकारी पहुंचे थे। इसी आधार पर ED अधिकारियों का तर्क है कि इस छापेमारी में बाधा से जुड़ी शिकायत वे दिल्ली के थाने में दर्ज करा सकते हैं। हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला ED का दिल्ली मुख्यालय करेगा।
ED अधिकारियों का यह भी कहना है कि उनकी शिकायत का मुख्य आधार कोलकाता और विधाननगर पुलिस का रवैया है। राज्य की प्रशासनिक प्रमुख खुद मुख्यमंत्री हैं और आरोप है कि उन्हीं के साथ दोनों पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंचे और फाइल, लैपटॉप, मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क लेकर बाहर निकल गए। एक ED अधिकारी के मुताबिक, “ऐसे में कोलकाता के थाने में शिकायत दर्ज कराना बेकार होगा। क्या कोलकाता या विधाननगर पुलिस को नहीं पता कि किसी जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान ऐसा करना कानून के खिलाफ है? यहां सीधे तौर पर ED और कोलकाता पुलिस आमने-सामने हैं। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग की गई है।”
वहीं दूसरी ओर, गुरुवार की घटना को लेकर कोलकाता पुलिस जांच में जुटी हुई है। शेक्सपियर सरणी थाना ने प्रतीक जैन के घर की रजिस्टर बुक जब्त कर ली है और यह जांच की जा रही है कि छापेमारी के दिन ED अधिकारियों ने उसमें अपनी पहचान दर्ज की थी या नहीं। मुख्यमंत्री की शिकायत के आधार पर I-PAC प्रमुख के घर और दफ्तर से दस्तावेज चोरी के आरोप में शामिल ED अधिकारियों की पहचान करने की कोशिश भी की जा रही है। ED सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने अपना पहचान पत्र और सर्च वारंट दिखाया था, जैसा हर कार्रवाई में किया जाता है। इसलिए रजिस्टर बुक में नाम दर्ज करने की जरूरत नहीं थी।
गौरतलब है कि प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापेमारी ED के एक असिस्टेंट डायरेक्टर के नेतृत्व में की गई थी। हालांकि कोलकाता पुलिस उन अधिकारियों के नाम, पहचान और अन्य विवरण जानना चाहती है। साथ ही ED के साथ मौजूद केंद्रीय बल के छह जवानों की पहचान करने की भी कोशिश हो रही है। रविवार को लॉउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के आवास के एक केयरटेकर और दो सुरक्षा गार्डों को थाने बुलाया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले घटना के दिन मौजूद सुरक्षा गार्ड, केयरटेकर, मैनेजर और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद ED अधिकारियों को तलब करने पर फैसला लिया जाएगा।