आज के समय में भारत में लोगों के लिए घर के मायने काफी बदल गए हैं। अब सिर्फ चार दीवारों से घिरी जगह को ही घर नहीं कहा जाता है। आज के समय में यह चार दीवारों से कहीं ज्यादा है जिसमें अपने आस-पड़ोस के साथ तालमेल, कम्युनिटी और वैल्यू भी शामिल हो चुके हैं जो व्यक्ति का लंबे समय तक साथ निभाते हैं।
शहरी इलाकों में लोग सिर्फ सिर के ऊपर की एक छत नहीं बल्कि उससे कहीं ज्यादा चाहते हैं। लोगों के लिए घर का मतलब आराम, अपनेपन का अहसास और एक ऐसी जगह जिसकी हर ईंट, सड़क, पार्क और रास्ते से जुड़ाव महसूस हो।
अपने अनुभवों के आधार पर देश में कुछ प्रमुख टाउनशिप को वास्तविकता के धरातल पर आकार देने वाले अम्बुजा नेवटिया ग्रुप के चेयरमैन हर्षवर्धन नेवटिया ने बताया कि कैसे नियोजित विकास आधुनिक जीवन को परिभाषित कर रहे हैं।
इस बदलाव के बारे में बात करते हुए हर्षवर्धन नेवटिया कहते हैं कि घर का आइडिया चार दीवारों से आगे बढ़कर पूरे पड़ोस तक फैल रहा है, जो संतुलित और अपनेपन को दिखाता है। नेवटिया का कहना है कि नियोजित और विकास ही इस बदलाव के केंद्र में हैं। वह बताते हैं कि कैसे डिजाइन, संरचनाएं और प्राकृतिक माहौल साथ मिलकर आधुनिक जीवन के अगले अध्याय को आकार दे रहे हैं।
'ये हैं तैयार किए गए इकोसिस्टम'
नेवटिया का मानना है कि आज का योजनाबद्ध विकास सिर्फ निर्माण के लिए जमीन के टुकड़े नहीं हैं। वे कहते हैं, "ये तैयार किए गए इकोसिस्टम हैं," जिन्हें संरचना, सुरक्षा और वहनीयता के लिए सोच-समझकर बनाया गया है। बिना प्लान वाली कॉलोनियों या अलग-थलग हाउसिंग परियोजनाओं के विपरित आधुनिक प्लॉट वाली टाउनशिप में आवासिय प्लॉट को ग्रीन नेटवर्क, रास्तों, कम्युनिटी हब और जरूरी सेवाओं के साथ जोड़ा जाता है जिससे रोजमर्रा की जिंदगी आसानी और जुड़ाव के साथ चलती है।
हर्षवर्धन बताते हैं कि यह मॉडल एक अहम शहरी आकांक्षा यानी सामूहिक व्यवस्था के भीतर व्यक्तिगत आजादी की इच्छा को पूरा करता है। लोग अपने घरों को पर्सनलाइज कर अपनी इच्छानुसार बनवा सकते हैं। साथ ही एक पेशेवर डिजाइन की गई टाउनशिप में साझा संरचना और सुविधाओं का फायदा उठा सकते हैं। नेवटिया कहते हैं, "यह आजादी और समुदाय, प्राइवेसी और भागीदारी के बीच एक सोच-समझकर बनाया गया संतुलन ही तो है।"
'आधुनिक लाइफस्टाइल के लिए स्मार्ट डिजाइन'
हर्षवर्धन नेवटिया बताते हैं कि आज के नियोजित विकास की कई खासियतों में से एक उनकी मास्टर प्लानिंग होती है। वह बताते हैं कि इसमें सहज स्ट्रीट ग्रिड पर जोर दिया जाता है जो हवा, रोशनी और मूवमेंट को बेहतर बनाते हैं। खुली जगहों को सोच-समझकर रखा जाता है जबकि घर के अंदर का सर्कुलेशन इस तरह से प्लान किया जाता है कि निजता से समझौत किए बिना बातचीत को बढ़ावा मिले।
वह बताते हैं कि कई टाउनशिप नेबरहुड क्लस्टर के आधार पर बनाए जाते हैं जहां घर हरे-भरे कोर्ट, पैदल के लिए रास्ते या थीम वाले बगीचों के चारों ओर बनाए जाते हैं। यह तरीका विजुअल संतुलन को बनाता है और एक बड़ी योजना के अंदर छोटे, जुड़े हुए समुदायों को बढ़ावा देता है। नेवटिया बताते हैं कि डिजाइन को बनाते समय इंसानी पैमाने और सामाजिक बातों का ध्यान रखा जाता है। जो इस बात को पक्का करती है कि सड़कें सामंजस्यपूर्ण, सुरक्षित और अपनेपन की भावना के साथ जिंदादिल महसूस हों।
योजनाबद्ध टाउनशिप बन रहे हैं शहरों का फेंफड़ा
जैसे-जैसे शहर पर्यावरण में बदलाव और भीड़भाड़ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, योजनाबद्ध विकास शहरी इलाकों का हरा फेंफड़ा बनकर उभर रहे हैं। नेवटिया कहते हैं, "बारिश का पानी इकट्ठा करने, सोलर लाइटिंग, बायोस्वेल्स, छायादार रास्ते और पौधों के जरिए टाउनशिप के डिज़ाइन के हर पहलू में स्थिरता को शामिल किया जाता है। इससे हवा प्राकृतिक रूप से ठंडा और साफ होती है।"
वह कहते हैं, "हरियाली के साथ आगे बढ़ना भारत के कई बड़े प्लानर्स और विकास कार्यों से जुड़े लोगों के लिए कोई बाद की बात नहीं है बल्कि एक मार्गदर्शक सिद्धांत है।" पेड़-पौधों से घिरे पार्क, छायादार वृक्षों से ढंकी सड़कें और खुले बगीचे अब कम्युनिटी के लिए अहम जगह बन गए हैं। यहां लोग इकट्ठा होते हैं, घूमते हैं और कई बार अकेले बैठकर ही सोच-विचार करते हैं। नेवटिया का मानना है कि यहीं वह चीजें हैं जो यह दिखाते हैं कि जब डिजाइन प्रकृति का सम्मान करता है तो शहर ज्यादा मानवीय बनते हैं। उनमें जीवन ज्यादा समृद्ध और टिकाऊ होता है।
'दिखावटी सुंदरता से परे, यह अदृश्य संरचना है'
एक आधुनिक टाउनशिप को असल में क्या चीज परिभाषित करती है? इस बारे में बताते हुए हर्षवर्धन नेवटिया कहते हैं कि असली ताकत अक्सर उस चीज से परे होती है जो तुरंत दिखाई देती है। "दिखावटी सुंदरता से परे, यह अदृश्य संरचना है जो एक आधुनिक टाउनशिप की सफलता को परिभाषित करता है।"
उनका कहना है कि मजबूत उपयोगिता, मज़बूत डिजिटल संपर्क, कुशल कचरा प्रबंधन और अच्छी तरह से योजना बनाकर तैयार किए गए मोबिलिटी नेटवर्क - यहीं मिलकर एक सहज जीवन का अनुभव बनाते हैं। वे बताते हैं कि ये सिस्टम पैदल चलने वाले लोगों से लेकर गाड़ियों में घूमने वाले लोगों का समर्थन करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। ये लोग सुरक्षा या आराम से समझौता किए बिना आवाजाही में आसानी को सुनिश्चित करते हैं।
बदलते लाइफस्टाइल के साथ टाउनशिप कैसे विकसित हो रही हैं, इस बारे में बताते हुए नेवटिया कहते हैं कि डेवलपर्स अपनी योजनाओं में स्मार्ट संरचनाओं को तेजी से शामिल कर रहे है। "रोजमर्रा की जिंदगी में सुविधा, सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने के लिए फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क, CCTV सर्विलांस और ऐप आधारित कम्युनिटी मैनेजमेंट को प्रमुखता दी जा रही है।
नेवटिया के मुताबिक कई पीढ़ियों की जरूरतों के प्रति संवेदनशीलता ही इन टाउनशिप को सच में आधुनिक बनाती है। बच्चों के लिए सुरक्षित और मजेदार खेलने की जगहें हैं, युवाओं को फिटनेस और आराम करने की जगहें मिलती हैं जो उनकी तेज रफ्तार जिंदगी से मेल खाती हैं। वहीं वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखकर बनाए गए आरामदायक रास्ते और वेलनेस एरिया, जिसका वे खुलकर आनंद उठाते हैं। वह कहते हैं कि हमारा मुख्य उद्देश्य ऐसी जगहे बनानी है जो अपनों के साथ बढ़ें और विकसित हों।" इसके लिए आपसी संपर्कों, भलाई और अपनेपन की भावना पर जोर दिया जाए।
भारत की नई टाउनशिप से सीख
देश भर के कई टाउनशिप के उदाहरणों पर ध्यान देने के बाद हर्षवर्धन नेवटिया कहते हैं कि नियोजित टाउनशिप लंबे समय तक रहने लायक जगहों को ही परिभाषित कर रही हैं। वह हिमालय की तलहटी में सिलीगुड़ी और उसके आस-पास के शुरुआती टाउनशिप मॉडल का उदाहरण देते हैं कि कैसे सावधानीपूर्वक मास्टर प्लानिंग, परिवेश के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक संरचनाओं को शामिल करने से प्लॉट रहने लायक माहौल में बदला जा सकता है।
(साभार News Ei Samay)