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निर्मला सीतारमण की पहल से बदली कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में विकास की तस्वीर, शिक्षा, रोजगार और पर्यावरण को मिला बढ़ावा

वित्त मंत्रालय के कार्यालय द्वारा साझा किए गए ट्वीट थ्रेड में बताया गया कि आंध्र प्रदेश 2014 से 16 और कर्नाटक 2016 से राज्यसभा सांसद रहने के दौरान शुरू की गई। ये परियोजनाएं ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर परिवर्तन ला रही हैं।

By राखी मल्लिक

Jan 11, 2026 19:49 IST

नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के माध्यम से कई प्रभावशाली विकास कार्यों का नेतृत्व किया है। इन पहलों से इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका, पर्यावरण, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्रों में ज़मीनी स्तर पर ठोस बदलाव देखने को मिले हैं।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार रविवार को वित्त मंत्रालय के कार्यालय द्वारा साझा किए गए ट्वीट थ्रेड में बताया गया कि आंध्र प्रदेश 2014 से 16 और कर्नाटक 2016 से राज्यसभा सांसद रहने के दौरान शुरू की गई। ये परियोजनाएं ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर परिवर्तन ला रही हैं।

कर्नाटक में प्रमुख पहल

कर्नाटक में शुरुआती और अहम परियोजनाओं में बेंगलुरु की कालेना अग्रहार झील का पुनरुद्धार शामिल है। वर्ष 2017 में MPLADS के तहत 75 लाख रुपये की लागत से इस झील की गाद निकासी, तटबंध मज़बूती और पर्यावरणीय बहाली की गई।

इससे भूजल स्तर में सुधार, जैव विविधता बढ़ने, भारी बारिश के दौरान बाढ़ नियंत्रण और लोगों के लिए हरित सामुदायिक स्थान उपलब्ध हुआ।

इसी वर्ष उडुपी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड ज्वेलरी (IIGJ) की आधारशिला रखी गई। यह संस्थान क्षेत्र के पारंपरिक आभूषण उद्योग को आधुनिक रूप देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया।

MPLADS और जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन के सहयोग से संचालित इस संस्थान में अब तक 840 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। जिनमें कई SC और ST वर्ग की महिलाएं शामिल हैं जिन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण मिला है।

आधुनिक मशीनरी और CAD सुविधाओं से लैस इस संस्थान ने 760 से अधिक कारीगरों का परिचय कार्ड पंजीकरण कर उन्हें औपचारिक क्षेत्र से जोड़ा है।

स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा

मंगलुरु में सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप ऑपर्च्युनिटीज़ एंड लर्निंग (CEOL) की शुरुआत दिसंबर 2017 में हुई। MPLADS से आंशिक रूप से वित्तपोषित यह केंद्र स्टार्टअप इनक्यूबेशन और को-वर्किंग स्पेस प्रदान करता है। अब तक यहां AI आधारित मॉर्गेज एनालिटिक्स, आईटी सॉल्यूशंस, एड-टेक और डिजिटल लर्निंग से जुड़े 9 स्टार्टअप विकसित हुए हैं।

अक्टूबर 2025 में IIT धारवाड़ में DhaRti BioNEST बायो-इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। MPLADS और BIRAC के सहयोग से बने इस केंद्र में 15 स्टार्टअप कार्यरत हैं। 40 से अधिक उच्चमूल्य रोजगार सृजित हुए हैं और कई तकनीकों का व्यावसायीकरण हो चुका है।

कृषि और ग्रामीण आजीविका

कल्याण कर्नाटक के सात ज़िलों- बल्लारी, बीदर, कलबुर्गी, कोप्पल, रायचूर, विजयनगर और यादगिर—में किसान प्रशिक्षण और कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) स्थापित किए गए हैं। NABARD के सहयोग से बने इन केंद्रों में दालें, मूंगफली, फल और मिर्च जैसी फसलों का प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की जाती है। जिससे किसानों की आय बढ़ाने और फसल नुकसान कम करने में मदद मिल रही है।

जल संरक्षण और विज्ञान शिक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिशन अमृत सरोवर योजना के तहत कोलार ज़िले में 75 जलाशयों का पुनरुद्धार किया गया। जिस पर 1.85 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे जल सुरक्षा और कृषि को बल मिला।

मैसूरु में COSMOS (कॉसमोलॉजी एजुकेशन एंड रिसर्च-ट्रेनिंग सेंटर) के लिए MPLADS से 5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यहां बनने वाला डिजिस्टार-7 प्लेनेटेरियम, 15 मीटर के झुके हुए 8K LED डोम के साथ विश्व में अपनी तरह का पहला होगा। यह परियोजना विज्ञान शिक्षा के साथ पर्यटन और रोज़गार को भी बढ़ावा देगी।

आंध्र प्रदेश में विकास कार्य

2014 से 2016 के बीच आंध्र प्रदेश में MPLADS के तहत लगभग 10 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए। इनमें ग्रामीण और SC बस्तियों में 65 से अधिक सीमेंट सड़कें, RO जल संयंत्र, सामुदायिक भवन, महिला भवन, चक्रवात शेल्टर और डिजिटल सामुदायिक केंद्र शामिल हैं।

पेडामैनावनिलंका गांव में कटाव-रोधी तटबंध परियोजना, साथ ही कौशल विकास, स्वच्छता, सिंचाई और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी पहलों ने तटीय और ग्रामीण इलाकों में लोगों के जीवन स्तर और आपदा-रोधक क्षमता को बेहतर बनाया है।

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