नई दिल्ली : भारतीय आईटी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी एजेंटिक एआई को अपने व्यवसाय के विकास के लिए अपनाने पर जोर दे रहे हैं। इसके विपरीत पश्चिमी देशों का प्रमुख ध्यान पारंपरिक कार्यकुशलता बढ़ाने पर है। यह जानकारी थॉटवर्क्स नामक टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी कंपनी के सर्वे से सामने आई।
कंपनी के अनुसार इस सर्वे में सात देशों के 3 हजार 500 सी-लेवल और वरिष्ठ आईटी निर्णयकर्ता शामिल थे। जिनमें से 500 भारत के हैं।
सर्वे रिपोर्ट में कहा गया कि 48% भारतीय आईटी नेता एजेंटिक एआई को अपनी प्राथमिकता मानते हैं। एजेंटिक एआई ऐसे स्वायत्त सिस्टम हैं जो स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं, सोच सकते हैं और खुद को अनुकूलित कर सकते हैं।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार 48% भारतीय एजेंटिक एआई अपनाने में विश्व में सबसे आगे है जबकि अमेरिका में 28% और ऑस्ट्रेलिया में 23% नेता केवल पारंपरिक दक्षता पर ध्यान दे रहे हैं।
सर्वे में पाया गया कि भारतीय आईटी नेता न केवल एआई टूल्स को अपना रहे हैं, बल्कि एआई-आधारित बिज़नेस मॉडल के लिए तैयारी कर रहे हैं।
सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष :
93% का मानना है कि प्रभावी एआई पहल लोगों की क्षमताओं और काम की गति बढ़ाती हैं।
86% मानते हैं कि एआई कर्मचारियों की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उनकी कुशलता बढ़ा रहा है।
57% ने कहा कि मानव-एआई सहयोग के कारण नए रोल्स और जिम्मेदारियां बढ़ी हैं।
35% व्यक्तियों ने एआई के कारण पूरी तरह नए करियर रास्ते बनाए हैं।
अगले 12 महीनों में एआई का सबसे बड़ा असर कर्मचारी निर्णय क्षमता में सुधार होगा। भारतीय नेता वैश्विक नेताओं की तुलना में एआई से राजस्व बढ़ने की अधिक उम्मीद रखते हैं।
49% का मानना है कि अगले 5 साल में 15% से अधिक राजस्व वृद्धि होगी, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक भरोसा है।
14% को उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में 15% से अधिक राजस्व बढ़ेगा, जो वैश्विक औसत 8% से लगभग दोगुना है।
सर्वे से स्पष्ट होता है कि भारतीय आईटी कंपनियां एआई को सिर्फ टूल के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे विकास, नई नौकरियों और व्यवसाय बढ़ाने के लिए मुख्य हथियार के रूप में अपना रही हैं।