I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और ऑफिस में गुरुवार को हुई ED की छापेमारी के विरोध में शुक्रवार को तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने जादवपुर 8बी से हाजरा मोड़ तक प्रतिवाद रैली निकाली थी। अब रविवार को विरोधी पार्टी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी जादवपुर 8बी बस स्टैंड से रैली निकाली जो देशप्रिय पार्क तक गयी।
बताया जाता है कि भाजपा नेता की यह रैली I-PAC के ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी के समय मुख्यमंत्री के पहुंचने और कई दस्तावेज लेकर वहां से निकल जाने के विरोध में निकाली गयी है। हालांकि इस रैली को लेकर राज्य की सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल ने कटाक्ष करने का मौका नहीं गंवाया है।
शुभेंदु अधिकारी का धिक्कार जुलूस
रविवार को भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने धिक्कार जुलूस से मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "यहां कोई फिल्म स्टार नहीं है। रुद्रनील घोष भी अब राजनेता ही हैं। उस दिन का शो सरकार का शो था। आज की रैली वास्तविक है। भवानीपुर में हराकर पूर्व मुख्यमंत्री बनाकर ही मैं रुकूंगा। जो कर सकते हैं कर लें। सभी ने देखा, ममता बनर्जी फाइल छिनकर लेकर आ गयी और गर्व के साथ उसे बताया भी। सब कुछ छिनतई करके ले गयी हैं।" प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि इसके विरोध में ही रविवार को रैली निकाली गयी है।
शमीक भट्टाचार्य का कटाक्ष
रविवार को तृणमूल को कटाक्ष करते हुए शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि तृणमूल और भ्रष्टचार का मतलब एक ही है। मुख्यमंत्री ने इस फाइल को छिनकर इस बात को साबित कर दिया है। फाइल लेकर आते समय उनके साथ उनके व्यक्तिगत सुरक्षाकर्मी भी थे। वे राज्य सरकार के पुलिस कर्मी हैं। उन्हें साथ में लेकर ही इस काम को करने निकल पड़ी।
शमीक ने कहा कि पूरे देश के लोग हंस रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस अगणतांत्रिक, असंवैधानिक व्यवहार के विरोध में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में जादवपुर 8बी बस स्टैंड से रासबिहारी तक रैली निकाली गयी है।
तृणमूल ने कटाक्ष का मौका नहीं गंवाया
हालांकि भाजपा व शुभेंदु अधिकारी की इस रैली पर कटाक्ष करने का मौका तृणमूल ने नहीं गंवाया। पार्टी के प्रवक्ता अरुप चक्रवर्ती ने कहा, "कौआ अगर मोर पंख लगा ले तो वह मोर बन जाता है क्या? शुभेंदु अधिकारी को भी पूरी जिंदगी ममता दीदी की छत्रछाया में ही रहना होगा। ममता दी ने जादवपुर से रैली निकाली थी इसलिए शुभेंदु ने भी उनकी नकल करके जादवपुर से ही रैली निकाली। ठीक उसी तरह जैसे 21 जुलाई को शुभेंदु को भी सभा करनी होती है। लेकिन अंत में कौआ हमेशा कौआ ही रहता है, कोई मोर नहीं बन जाता है।"