मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर से देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर कई शिकायतें की। साथ ही उन्होंने पत्र के अंत में कटाक्ष भी करते हुए लिखा है, "मुझे पता है आप इस पत्र का उत्तर नहीं देंगे लेकिन...!" राज्य में SIR की सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है।
इस बीच राज्य भर के अलग-अलग हिस्सों में करीब 77 लोगों की मौत हो चुकी है, 4 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया है और 17 लोग बीमार पड़े थे जिनका इलाज चल रहा है। उन्होंने अपने पत्र में कई आरोप भी लगाए हैं। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से खुद ही पोस्ट कर इस बारे में जानकारी दी है।
महिला मतदाताओं को परेशान किया जा रहा
शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे अपने पत्र में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि शादी हो जाने की वजह से काफी महिलाएं अपना घर छोड़कर ससुराल में रहती हैं। ऐसे मामलों में महिलाओं का सरनेम और पता भी बदल जाता है। ममता बनर्जी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्हें क्यों सुनवाई में बुलाया जा रहा है। उन्होंने लिखा है, "इसे देखकर ही समझा जा रहा है सिर्फ सामाजिक संवेदनशीलता का ही अभाव नहीं है बल्कि इस प्रक्रिया के माध्यम से वैध महिला मतदाताओं को अपमानित भी किया जा रहा है।"
प्रशिक्षण का अभाव
SIR के सुनवाई की प्रक्रिया की जांच के लिए राज्य में पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है। ममता बनर्जी का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन जैसे एक महत्वपूर्ण काम के लिए आवश्यक प्रशिक्षण के बिना ही पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गयी है। उनका आरोप है कि कई मामलों में आम मतदाताओं को मौखिक रूप से भी अपमानित किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस लगातार 'तार्किक विसंगति' को लेकर अपनी आवाज उठाता रहा है। हाल ही में तृणमूल का 10 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिला और उन्हें इस बाबत अपनी शिकायतें जमा की। बताया जाता है कि 'तार्किक विसंगति' के कारण करीब 1 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।
नाम, पता, उम्र की विसंगति होने पर ही अपमानित
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि अगर किसी मतदाता के नाम, पता और उम्र से जुड़ी त्रुटि रहने पर ही उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है और उन्हें अपमानित किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने उदाहरण देते हुआ लिखा है कि किसी एक दस्तावेज में मतदाता का नाम Mamta है और किसी दस्तावेज में Mamata, किसी मतदाता का मिडिल नेम कुमार है और किसी के दस्तावेज में Komar या Kumer लिखा हुआ है।
किसी मतदाता का अपने माता-पिता के साथ उम्र का अंतर 18 या 19 साल का है। उन्हें भी सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। इस तरह की छोटी-छोटी गलतियों की वजह से भी लोगों को परेशान करने की वजह से उनकी रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा है। इसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
साथ ही ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि काफी गणमान्य लोगों को भी सुनवाई के लिए बुलाकर उन्हें अपमानित किया जा रहा है। उदाहरण के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन से लेकर जय गोस्वामी, अभिनेता देव तक को बुलाया गया है।
प्रवासी मजदूरों की समस्या
जो मतदाता पढ़ाई और काम के सिलसिले में घर से दूर रहते हैं, उनके बारे में हाल ही में चुनाव आयोग ने नए नियम की घोषणा की है। आयोग ने कहा है कि सुनवाई में मतदाताओं के उपस्थित नहीं होने पर उनका कोई करीबी रिश्तेदार उपस्थित रह सकता है। लेकिन दूसरे राज्यों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। इसे लेकर भी ममता बनर्जी ने सवाल उठाया है।
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में लिखा है, "इस तरह की घटनाओं से ही पता चलता है कि मतदाता सूची में संशोधन या मतदाताओं को सूची में जोड़ने के लिए नहीं बल्कि मतदाताओं को सूची से हटाने के लिए।" पत्र के अंत में उन्होंने कटाक्ष करते हुए लिखा है, "हालांकि मुझे पता है कि आप मेरे पत्र का जवाब नहीं देंगे लेकिन इन विषयों को आपके सामने लाना मेरा कर्तव्य था।"