शुक्रवार (9 जनवरी) से एपीजे (Apeejay) कोलकाता लिटररी फेस्टिवल 2026 (AKLF) की शुरुआत हुई। इस उद्घाटन समारोह अलीपुर म्यूजियम में आयोजित किया गया। 11 जनवरी (रविवार) तक इस फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा जिसमें अपने क्षेत्रों के जाने-माने लोग, लेखक, लिटरेरर्स और जानकार हिस्सा लेने वाले हैं।
उद्घाटन समारोह के दौरान 'भारतीय पॉप संगीत की रानी' उषा उत्थुप और बीते दिनों की दिग्गज अभिनेत्री माधबी मुखर्जी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। दीप प्रज्जवलन के बाद उषा उत्थुप ने महादेव का 'महामृत्युंजय मंत्र' भी गाया जिसे सुनकर उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
इस कार्यक्रम के दौरान माधबी मुखर्जी के संस्मरण 'माधबीज़ गार्डन' का अंग्रेजी भाषा में संस्मरण भी लॉन्च किया गया। मूल रूप से बांग्ला में लिखे गए इस संस्मरण का नाम 'माधबीकानन' है। अरुणाभ सिन्हा ने इसे अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया है।
खास बातचीत के दौरान माधबी मुखर्जी से जब पूछा गया कि 'महानगर' या 'कोलकाता 71' जैसी मशहूर फिल्मों की तुलना में बांग्ला फिल्मों में उन्होंने किस तरह के बदलाव को महसूस किया है तो उन्होंने बताया, "पहले फिल्में साहित्य पर आधारित हुआ करती थी। इसमें अब बदलाव आ चुका है। हर तरह एक तनाव जैसा माहौल बन गया है। मुझे नहीं पता क्यों लेकिन जो लोग समाज के लिए काम करते हैं उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए।"
जो युवा स्वतंत्र कला और अभिनय के क्षेत्र में आने वाले हैं, उन्हें अपना संदेश देते हुए माधबी मुखर्जी ने कहा, "उन्हें इमानदारी के साथ अपना काम करना और किसी चीज के बारे में नहीं सोचना चाहिए। लेकिन उन्हें यह भी समझना होगा कि उन्हें कहां काम करना चाहिए। काफी लोग अब सीरियल्स में काम करते हैं लेकिन फिल्मों में नहीं। मैं भी उन्हीं लोगों में से एक हूं।"
उन्होंने आगे कहा कि मैं अब धारावाहिकों में काम करती हूं और फिल्मों में नहीं। कोई भी कहानी अच्छी नहीं होती है। मैं 30 मिनट तक लगातार कोई कहानी नहीं सुन सकती। अगर कोई अच्छी कहानी के साथ आता है तो मैं दिल से काम करना पसंद करूंगी।
वहीं देश के प्रमुख ट्रांसलेटर अरुणाभ सिन्हा ने खास बातचीत में बताया कि माधबी मुखर्जी के संस्मरण के साथ ही उनकी सबसे बड़ी रचना - द बंगाल रिडर भी हाल ही में रिलीज हुई है। इस पुस्तक में सिन्हा ने पिछले 2 दशकों के बांग्ला लेखों और साहित्यों के साथ ही राजा राम मोहन राय, माइकल मधुसुदन दत्ता, विभूतीभुषण बंद्योपाध्याय, जय गोस्वामी समेत कई बांग्ला लेखकों की रचनाओं का ट्रांसलेशन भी शामिल किया है।
उन्होंने बताया कि इस किताब का आइडिया मेरे एक प्रकाशक की ओर से आया। मैंने शुरुआत में ऐसा ही कुछ काम किया था, जिसका नाम 'द ग्रेटेस्ट बंगाली स्टोरिज एवर टोल्ड' था। 'द बंगाल रिडर' के पीछे की प्रेरणा स्रोत के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा बांग्ला कहानियों की किताब प्रकाशित होने के बाद प्रकाशक ने मेरे क्षेत्र को विस्तृत करते हुए बांग्ला लेखों के सभी क्षेत्रों को एक जगह पर एकत्र कर कुछ लिखने के बारे में कहा।
सिन्हा ने कहा, "यह अविश्वसनीय था क्योंकि मैंने 125 से ज्यादा लेखकों के कामों पर काम किया। ये इतिहास के अलग-अलग समय, अलग-अलग जगहों और अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से 125 अलग-अलग लोगों की आवाजें थीं। यह एक शानदार अनुभव रहा।" अरुणाभ सिन्हा से जब यह पूछा गया कि क्या AI के आने से नई पीढ़ी की पढ़ने की आदतों पर बुरा असर पड़ा है तो उन्होंने कहा कि इसके नाम में ही 'आर्टिफिशियल' है। मुझे लगता है कि यह कहानी सुनाता है। हम इंसान हैं और अगर हम इंसान के तौर पर अपनी पहचान बनाए नहीं रखते हैं तो हम कहां पहुंचेंगे?
सेशन में माधबी मुखर्जी ने मशहूर बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री और गायिका कानन देवी और फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के बारे में बात की। साथ ही उन्होंने महान कलाकारों जैसे शिशिर भादुड़ी और छवि विश्वास के साथ स्टेज पर काम करने और ऋत्विक घटक के निर्देशन में फिल्मों में काम करने के अपने अनुभवों के बारे में भी बताया।
ऊषा उत्थुप ने अर्थपूर्ण गानों के बारे में बात की, जो कहानियां सुनाते हैं और लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाते हैं। उन्होंने किताबों की खुशबू से भरे कमरों और अपनी पसंदीदा किताबों के बारे में भी बताया।
(साभार News EiSamay)